
Baloch Liberation Army BLA: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अक्टूबर के मध्य में किए गए कई हमलों को लेकर ऐसे आंकड़े जारी किए हैं, जिन्होंने पाकिस्तानी सेना की चुनौतियों को चर्चा में ला दिया है। संगठन ने सैन्यकर्मियों को निशाना बनाने से लेकर प्रमुख व्यापारिक रास्तों पर कार्रवाई तक के दावे किए हैं। वहीं, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और सैन्य प्रतिष्ठान इन घटनाओं को भारत से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
बलोच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है कि उसने 9 से 20 अक्टूबर के बीच पाकिस्तान में 34 अभियान चलाए। संगठन के मुताबिक, इन कार्रवाइयों में पाकिस्तानी सेना के 14 जवान और मिलिट्री इंटेलिजेंस तथा कथित 'डेथ स्क्वॉड' से जुड़े नौ सदस्य मारे गए। BLA ने एक सैन्यकर्मी को पकड़ने और मुख्य मार्गों पर जांच अभियान चलाने की बात भी कही है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है। संगठन ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में उसके छह सदस्य मारे गए।
BLA की ओर से जारी घटनाक्रम के अनुसार, 9 अक्टूबर को तुर्बत के नसीराबाद में हमला किया गया। इसके बाद 13 अक्टूबर को हरनाई के शहरग इलाके में सड़क किनारे लगाए गए विस्फोटक से सेना के वाहन को निशाना बनाने का दावा सामने आया। संगठन ने तीन सैनिकों की मौत और चार अन्य के घायल होने की बात कही।
इसी अवधि में चगाई, मस्तुंग, खुजदार और बुलेदा जैसे इलाकों में भी हमलों की जानकारी दी गई। BLA के अनुसार, कुछ कार्रवाइयों में सैन्य काफिलों और चौकियों को निशाना बनाया गया, जबकि क्वेटा-ताफतान व्यापार मार्ग पर वाणिज्यिक वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। संगठन ने कुछ स्थानीय लोगों पर सेना के लिए जासूसी करने के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का दावा भी किया है।
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। कम से कम जमीन के हिसाब से। यहाँ गैस, खनिज और बाकी कई दूसरे संसाधन खूब हैं। लेकिन एक झलक देखें तो, स्थानीय लोगों के लिए हालात इतने बढ़िया कभी नहीं रहे। उन्हें राजनीति में हिस्सेदारी, संसाधनों का बंटवारा और विकास इन सबको लेकर बरसों से नाराजगी है। इसी नाराजगी के चलते यहां के कुछ बलूच राष्ट्रवादी संगठन बंदूक उठा लेते हैं।
पाकिस्तानी सरकार और फौज की राय अलग है। उनका कहना है कि ये संगठन देश की सुरक्षा और विकास के काम में रोड़े अटकाते हैं। दूसरी तरफ, बलूच संगठनों का आरोप है कि सरकार उनके हक की अनदेखी करती है और दमन करती है। इस खींचतान का असर सिर्फ नेता या संगठन नहीं झेलते आम लोग, कारोबार और खुद इलाके की फिजा पर भी इसका असर पड़ता है।
ताजा सुरक्षा अभियानों में भी पाकिस्तान की तरफ से भारत से जुड़े होने के आरोप लगे हैं। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ISPR ने बताया कि ग्वादर के शादी कौर, पसनी और कलात के जट्टकाबाद में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई हुई। बयान में बलूच संगठन के लिए ‘फितना-अल-हिंदुस्तान’ जैसे शब्द भी इस्तेमाल हुए।
पाकिस्तान ये कहते आया है कि बलूचिस्तान में जो सशस्त्र संगठन एक्टिव हैं, उन्हें भारत से मदद मिलती है। लेकिन इन दावों के लिए अकसर ठोस, स्वतंत्र जांच का सबूत जरूरी होता है। भारत ने ये आरोप पहले भी नकारे हैं। ऐसे में, BLA की गतिविधियों या पाकिस्तान के दावों को समझते वक्त जरूरी है कि हम सरकारी बयानों, स्वतंत्र खबरों या पक्के प्रमाणों के बीच फर्क करें।