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‘अमेरिका के प्रतिबंध हमारे लिए युद्ध जैसे’, ईरान ने जताई नाराजगी, यूएई और चीन के साथ रिश्तों पर कही बड़ी बात

Iran US Sanctions: अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और नाकेबंदी को ईरान ने 'युद्ध की कार्रवाई' बताया है। जानें तेहरान का अगला रुख, यूएई पर असर और चीन-तुर्किये के संबंधों पर विशेषज्ञ की राय।
2 min read
Aug 24, 2026
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प्रतिबंधों और नाकेबंदी पर ईरान का कड़ा रुख, दोनों को बताया युद्ध / फोटो सोर्स-X(@A_K_Mandhan)

Iran US Sanctions: अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी को ईरान अब केवल आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि सीधे तौर पर युद्ध की कार्रवाई के रूप में देख रहा है। तेहरान के अंतरराष्ट्रीय मामलों के शोधकर्ता मोहसेन फरखानी ने साफ कहा कि वाशिंगटन का यह कदम सिर्फ आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि सीधे तौर पर 'युद्ध का ऐलान' है। उनका कहना है कि जब पाबंदियां युद्ध जैसी हैं, तो ईरान को भी इसका जवाब देना ही पड़ेगा। इसके बावजूद फरखानी का मानना है कि अमेरिका के कड़े रुख के बाद भी चीन और तुर्किये जैसे प्रमुख देश तेहरान के साथ अपने व्यापारिक व कूटनीतिक रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं करेंगे।

यूएई और व्यापारिक संबंधों पर अमेरिकी दबाव

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ अपना कारोबार कम किया है। इस पर फरखानी का कहना है कि यूएई ने यह कदम केवल अमेरिकी दबाव में आकर उठाया है। ईरान और यूएई सदियों से पड़ोसी रहे हैं और दोनों के बीच बहुत पुराने संबंध हैं, जिन्हें पूरी तरह खत्म करना नामुमकिन है।

शांति और नियम मान रहा है तेहरान

ईरान के अगले कदम पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने अब तक काफी सब्र से काम लिया है। ईरान का हर कदम अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रस्तावों के दायरे में ही है, ताकि दुनिया के सामने उसकी छवि सही बनी रहें।

'अगर ट्रंप ने कोई कदम उठाया, तो ला देंगे भूकंप'

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ नेता मोहसेन रजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी है। रजाई ने कहा कि अगर ट्रंप कुछ भी दुस्साहस करने की कोशिश करते हैं, तो ईरान भूकंपीय स्तर पर जवाबी कार्रवाई करेगा।
रजाई ने साफ किया कि जवाब में ईरान फारस की खाड़ी में तेल ले जाने वाले उन सभी वैकल्पिक समुद्री रास्तों को निशाना बनाएगा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य की जगह इस्तेमाल हो रहे हैं।

60 दिनों का अंतरिम समझौता खत्म, बढ़ा संकट

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस तनाव के बीच कहा कि जून में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन 'न युद्ध, न शांति' की अनिश्चित स्थिति से निकलने का सबसे बेहतर रास्ता था। हालांकि, युद्ध समाप्त करने और परमाणु कार्यक्रम पर सहमति बनाने के लिए रखी गई 60 दिनों की समय सीमा बीते सप्ताह खत्म हो चुकी है और इसके विस्तार को लेकर फिलहाल कोई नया संकेत नहीं मिला है।
दूसरी तरफ अमेरिकी सेना का दावा है कि उसकी नाकेबंदी के कारण ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले करीब 70 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला गया है, जबकि तीन जहाजों को निष्क्रिय किया जा चुका है। दोनों देशों के इस रुख से खाड़ी देशों में तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरे संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

Updated on:
24 Aug 2026 08:59 am
Published on:
24 Aug 2026 08:58 am
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