दो व्हेलों ने हाल ही में स्विमिंग करते हुए कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसके बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा। क्या? आइए नज़र डालते हैं।
हम्पबैक व्हेलें आमतौर पर अपनी मां से सीखे हुए एक तय और अनुमानित रास्ते पर ही सफर करती हैं। वो गर्मियों में बर्फीले पानी में 'क्रिल' यानी सूक्ष्म झींगे खाती हैं और सर्दियों में प्रजनन के लिए उष्णकटिबंधीय गर्म पानी का रुख करती हैं। लेकिन दो व्हेलों ने इस स्थापित नियम को तोड़कर विपरीत दिशाओं में महासागरों के आर-पार ऐसी स्विमिंग की, जिसने वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं।
'रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस' जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी के अनुसार दो हम्पबैक व्हेलों ने ऑस्ट्रेलिया और ब्राज़ील के बीच अटलांटिक और प्रशांत महासागर पार करते हुए लगभग 14,500 से 15,000 किलोमीटर की ऐतिहासिक दूरी तय की है। इनमें से एक व्हेल ने लगभग 15,000 किलोमीटर का सफर तय करते हुए कोलंबिया से जंजीबार (अफ्रीका) तक तैरने वाली एक अन्य हम्पबैक व्हेल के पिछले वैश्विक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
वैज्ञानिकों और 'सिटिज़न साइंटिस्ट्स' ने पिछले 40 सालों में ली गई 19,000 से ज़्यादा व्हेलों की तस्वीरों का बारीकी से विश्लेषण किया गया। जैसे इंसानों के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं, वैसे ही हर हम्पबैक व्हेल की पूंछ का रंग, पैटर्न और उसके नुकीले किनारे अद्वितीय होते हैं। एआई सॉफ्टवेयर की मदद से अलग-अलग सालों में पूर्वी ऑस्ट्रेलिया और सीधे ब्राज़ील के ब्रीडिंग सेंटर्स पर दिखने वाली व्हेलों का मिलान किया, जिससे पुष्टि हुई कि ये दोनों वही 'रिकॉर्ड-ब्रेकर' व्हेलें थीं।
तस्वीरें सिर्फ यात्रा की शुरुआत और अंत में ही खींची गई थीं, इसलिए व्हेलों ने समंदर के भीतर कौन सा रास्ता चुना, यह अभी भी एक रहस्य है। माना जा रहा है कि ये व्हेलें शायद किसी साझा फीडिंग ग्राउंड पर दूसरी व्हेलों से मिली होंगी और वापस अपने पुराने ठिकाने पर जाने के बजाय उनके साथ नए रास्ते पर निकल गईं।
वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिणी गोलार्ध की व्हेलों के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना इसलिए आसान है क्योंकि वहाँ विशाल खुले महासागर हैं। इसके विपरीत उत्तरी गोलार्ध में बड़े-बड़े महाद्वीप मौजूद हैं जो व्हेलों के सीधे समुद्री सफर के रास्ते में एक बड़ी बाधा बनते हैं।