
US Sanctions Relief: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि अस्थायी रोक की राजनयिक घोषणा के बावजूद, पिछले एक हफ्ते में मॉस्को ने यूक्रेन के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए दर्जनों हमले किए हैं। उन्होंने 'X' पर लिखा, "एक हफ्ते पहले अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा 'ऊर्जा युद्धविराम' (energy ceasefire) की घोषणा के बाद से, रूस ने जानबूझकर यूक्रेन के ऊर्जा, तेल और गैस क्षेत्रों पर 76 बार हमले किए हैं।" उन्होंने बताया कि हालिया बमबारी से विन्नित्सिया, जाइटॉमिर, खमेलनित्सकी और ओडेसा क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है।
साथ ही, जेलेंस्की ने कहा कि प्रतिबंधों में ढील देने के वाशिंगटन के हालिया नीतिगत बदलाव से क्रेमलिन (रूस) को और अधिक आक्रामक होने का बढ़ावा मिलेगा। यूक्रेनी नेता ने चेतावनी दी कि अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों में और भी ढील दी जा सकती है।
जेलेंस्की ने 'X' पर लिखा, "इन सब को वापस लेने और प्रतिबंधों को हटाने का फैसला मुझे गलत लगता है। इससे निश्चित रूप से केवल रूसियों को ही मदद मिलती है।"
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश के जरिए, रूस से जुड़े उन महत्वपूर्ण अमेरिकी प्रतिबंधों और शुल्कों को हटा दिया गया, जिन्हें हाल ही में लागू 'ग्राहम एक्ट' (Graham Act) के तहत प्रभावी होना था। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यह अस्थायी राहत राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर दी गई है। 2022 में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद, मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए ही यह कानूनी ढांचा तैयार किया गया था।
बदलती राजनयिक स्थितियों और कीव प्रशासन की हो रही सार्वजनिक आलोचना के बीच, जेलेंस्की ने तर्क दिया कि इन कदमों से शत्रुता कम नहीं हो रही है। जेलेंस्की ने लिखा, इससे उन्हें केवल संतुष्टि मिलती है और लोगों को मारते रहने की उनकी इच्छा और बढ़ती है। इससे निश्चित रूप से युद्ध नहीं रुकने वाला है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि,रूस यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रह है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रूसी सेना जानबूझकर यूक्रेन के पावर ग्रिड और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बना रही है ताकि सर्दियों के मौसम में देश को पूरी तरह से अंधकार और ठंड में धकेला जा सके। लगातार हो रहे इन हमलों के कारण यूक्रेन के कई हिस्सों में बिजली की भारी किल्लत हो गई है और आपातकालीन ब्लैकआउट लागू करना पड़ा है।