चीनी समर्थन वाले कोलंबो सिटी पोर्ट को लेकर मचे बवाल पर मंत्री की सफाई, बोले- 100 फीसदी स्वामित्व सरकार के पास

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में चीनी सिटी पोर्ट को लेकर विरोध के बीच सरकार की सफाई, बोले- 100 फीसदी स्वामित्व हमारे पास

By: धीरज शर्मा

Published: 19 Apr 2021, 11:10 AM IST

नई दिल्ली। श्रीलंका ( Sri Lanka ) में चीन के खिलाफ भारी विरोध शुरू हो गया है। श्रीलंका की सरकार बेपरवाह होकर पिछली गलतियों से सबक नहीं लेते हुए चीन ( China ) के साथ करार कर रही है, लेकिन श्रीलंका की जनता और सिविल सोसाइटी की ओर से श्रीलंका में चीन के खिलाफ भारी विरोध शुरू हो चुका है।

श्रीलंका में सिविल सोसाइटी, विपक्ष, लेबर यूनियन और आम जनता की तरफ से श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों याचिकाएं डाली गई हैं, जिसमें श्रीलंका के कोलंबो ( Colombo ) में बनने वाले चीनी पोर्ट सिटी ( Port City ) का विरोध किया जा रहा है। इस बीच मंत्री सब्री ने मामले में सरकार की ओस से सफाई दी है।

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श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में चीन सिटी पोर्ट बनाने वाला है, जिसका श्रीलंका में भारी विरोध किया जा रहा है। श्रीलंका के लोगों का कहना है कि सरकार ने देश की संप्रभुता को ताक पर रखकर चीन के साथ समझौता किया है। श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट में अब सोमवार को तमाम याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।

इस बीच सरकार के मंत्री सब्री ने कहा है कि, निवेश क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 269 हेक्टेयर और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए 91 हेक्टेयर है। उन्होंने कहा कि परियोजना का स्वामित्व चीनी कंपनी को नहीं दिया जा सकता है।

सब्री ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र की शेष भूमि में से 116 हेक्टेयर या 43 प्रतिशत परियोजना कंपनी को दी जाएगी, जिसने 2013 में परियोजना शुरू की थी और पोर्ट सिटी को विकसित करने के लिए 1.4 बिलियन अमरीकी डालर खर्च किए थे।

उन्होंने कहा कि सभी 100 फीसदी भूमि सरकार के स्वामित्व में है। यह कहना पूरी तरह से गलत है कि भूमि किसी और को दी गई थी।

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ये है मामला
आपको बता दें कि श्रीलंका की महिन्द्रा राजपक्षे सरकार ने पिछले हफ्ते श्रीलंकन संसद में कोलंबो पोर्ट सिटी इकोनॉमिक कमीशन नाम का एक बिल पेश किया है।

इस बिल में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में समंदर किनारे 1 अरब 40 करोड़ रुपए की लागत से एक पोर्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव है।

इसके बाद इस बिल का पूरे श्रीलंका में भारी विरोध किया जा रहा है। श्रीलंका के लोगों का कहना है कि इस बिल के जरिए श्रीलंका में चीन को असीमित शक्तियां दी जा रही हैं और ये बिल श्रीलंका की संप्रभुता के लिए खतरा है।
इस बिल से श्रीलंका की संप्रभुता का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है, लिहाजा ये बिल रद्द होना चाहिए।

धीरज शर्मा
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