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अजब-गजब : इंद्रदेव को मनाने धूमधाम से लेकर पहुंचे मेंढक की बारात, फिर मेंढकी से कराई शादी

बारिश के लिए गाजे-बाजे के साथ ग्राम डूमरखोला से निकली मेंढक की बारात डौरा पहुंची, तीन-चार गांव के लोग इस अनोखी शादी में हुए शामिल
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बलरामपुर

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Ram Prawesh Vishwakarma

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Updated: 15 Jul 2018, 10:01 PM IST

Frog marriage

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राजपुर. आधुनिक युग में आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग खेती-किसानी के सीजन में बारिश होने के लिए पूजा-पाठ के साथ ही कई परंपरागत तरीके अपनाते हैं। जो अपने आप में अनोखे व सुर्खियां बटोरने वाले होते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा रविवार को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के डौरा बाजार के पास देखने को मिला।

यहां अब तक बारिश न होने से चिंतित ग्रामीणों ने एकजुट होकर धूमधाम से मेंढक-मेंढकी की शादी कराई। बाकायदा एक गांव से मेंढक की बारात निकली जो गाजे-बाजे के साथ डौरा पहुंची, फिर यहां शादी कराई गई।

खेती-किसानी के सीजन में 15 जुलाई होने के बाद भी क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण किसानों को चिंता सता रही है। पानी न गिरने के कारण किसानों की फसल पिछड़ती जा रही है। इससे चिंतित ग्राम डूमरखोला व आसपास के ग्रामीणों ने वर्षों से चली आ रही एक अनोखे परंपरागत तरीके को अपनाने की ठानी।

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ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि मेंढक-मेंढकी की शादी कराने से अच्छी बारिश होती है और इंद्रदेव भी मान जाते हैं। इसी मान्यता के अनुसार उन्होंने रविवार को धूमधाम व अपने रीति-रिवाज से मेंढक-मेंढकी की अनोखी शादी कराई, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय रही।

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शादी में बारातियों का हुआ स्वागत
ग्राम डूमरखोला के निवासी दोपहर 12 बजे गांव से मेंढक की बारात गाजे-बाजे के साथ लेकर निकले। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बाराती नाचते-गाते ग्राम डौरा पहुंचे। यहां उनका स्वागत डौरा के लोगों द्वारा किया गया।

फिर विधि-विधान से पूजा-पाठ करने के बाद मेंढक-मेंढकी की शादी कराई गई। इस अनोखी शादी में ग्राम कोचली, डूमरखोला, डौरा व अन्य गांव के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।