व्यक्ति आवश्यक और अनावश्यक का विवेक रखे

धर्मसभा में बोले आचार्य महाश्रमण
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला आज प्रदान करेंगे अणुव्रत पुरस्कार

बेंगलूरु. आचार्य महाश्रमण कहा कि जब तक आदमी अंतर्मुखी नहीं बनता है तब तक वह बाह्य आसक्तिपूर्ण प्रवृत्तियों को नहीं छोड़ सकता है। आसक्ति को नहीं छोडऩे के कारण उसे आत्मीय आनंद का अंश नहीं मिल पाता है। व्यक्ति इंद्रियों के माध्यम से बाह्य जगत से जुड़ा हुआ रहता है और सांसारिक कार्यों को संपन्न करता है। व्यक्ति को अपने जीवन में आवश्यक और अनावश्यक का विवेक रखना चाहिए। इसके माध्यम से साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है। हर व्यक्ति को यह प्रयास करना चाहिए कि वह अनावश्यक क्रियाओं से बचे। चाहे अनावश्यक रूप से बोलना, सुनना या खाना कुछ भी हो इससे बचने का प्रयास करना चाहिए। जब आसक्ति की भावना बढ़ जाती है तो वह अनावश्यक कार्यों में आगे बढ़ जाता है। कई बार इससे गलत परिणाम भी देखने को मिलते हैं। आचार्य ने कहा कि मौन की साधना अच्छी साधना होती है परंतु व्यक्ति को यह विवेक भी रखना चाहिए कि वह अपने मुंह से कटु बात, झूठ और फालतू बात ना बोले। इन बातों को ध्यान रखने से जीवन में अनेक समस्याएं हल हो सकती हैं और वाणी का संयम भी प्राप्त होता है। आचार्य ने कहा कि गुरु अपने शिष्यों को पथ दर्शन करने वाले होते हैं। उनके निर्देशों पर चले तो व्यक्ति विषयानंद से दूर हटकर सहजानंद की ओर बढ़ सकता है। सहजानंद प्राप्त करने के लिए अंतर्मुखी बनने की अपेक्षा रहती है जो व्यक्ति अंतर्मुखी न होकर बहिर्मुखी होते हैं उनमें विवेक की भी कमी होती है। विवेक व्यक्ति को जीवन में सही और गलत का बोध कराता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति गलत मार्ग पर आगे बढ़ जाता है। गुरु शिष्यों के बाहर की आंख नहीं बल्कि भीतर के चक्षु खोलने वाले होते हैं जिससे उनकी प्रज्ञा अंतर्मुखी बनें। भीतर की आंख खुलने पर व्यक्ति सतपथगामी बन जाता है अणुव्रत व्यक्ति को उत्पथगामी पथ से बचाने वाला सतपथ की ओर ले जाने वाला होता है।
प्रवचन में मुंबई जैन संघ के अध्यक्ष नितिन सोनावाल, पाटण विश्वविद्यालय के कुलपति बाबूलाल प्रजापति, भंवरलाल जीरावला, महासभा पूर्व अध्यक्ष हीरालाल मालू, अणुव्रत समिति बेंगलूरु अध्यक्ष कन्हैयालाल चिप्पड़ ने विचार व्यक्त किए।

अणुव्रत समिति द्वारा पुरस्कारों की घोषणा करते हुए अणुव्रत पुरस्कार वर्ष 2018 के लिए प्रसिद्ध अहिंसा विद प्रकाश आमटे को, अणुव्रत गौरव सम्मान वर्ष 2018 के लिए स्वतंत्रता सेनानी और प्रमुख अणुव्रती डॉक्टर बी.एन. पांडेय दिल्ली को, वर्ष 2019 के लिए प्रमुख अणुव्रती कार्यकर्ता और नेतृत्वकर्ता धनराज बैद दिल्ली तथा अणुव्रत लेखक पुरस्कार वर्ष 2018 के लिए प्रसिद्ध नैतिक और संविधान पर लेखन डॉ. धर्मचंद जैन (भीलवाड़ा) वर्ष 2019 के लिए अणुव्रत के सिद्धांतों पर काव्य लेखन करने वाली डॉ. पुष्पा सिंघी को प्रदान किए जाएंगे। आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला बुधवार को विजेताओं को यह पुरस्कार प्रदान करेंगे। मंच संचालन मुनि सुधाकर कुमार ने किया।

Yogesh Sharma
और पढ़े
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned