scriptWomen should not be strong, be self-supporting | सशक्त नहीं, स्वावलम्बी बनें महिलाएं | Patrika News

सशक्त नहीं, स्वावलम्बी बनें महिलाएं

नारी शक्ति अवार्ड विजेता रूमा देवी बोलीं

बैंगलोर

Updated: May 29, 2022 07:48:26 am

योगेश शर्मा

बेेंगलूरु. राजस्थान की सामाजिक कार्यकर्ता व नारी शक्ति अवार्ड विजेता रूमा देवी का कहना है कि जिस तरह राजस्थान में महिला सशक्तिकरण की अलख जगाई है। उसी तरह कर्नाटक में भी महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें स्वावलम्बी बनाने की पहल करनी होगी। इसके लिए गांव-गांव में जाकर बेराजगार व जरूरतमंद महिलाओं का चयन करना होगा और उन्हें रोजगार से जोडक़र स्वावलम्बी बनाने की दिशा में कार्य करने की जरूरत है।
सामाजिक कार्यकर्ता रूमादेवी जीतो ने शनिवार को राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में यह बात कही। वे ग्रांड समिट में बतौर अतिथि शिरकत करने बेंगलूरु आई हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को एकजुट कर यहां का कोई भी ऐसा काम जो स्थाई है उसे शुरू करना चाहिए। जरूरी नहीं कि हर महिला पढ़ी लिखी हो। इसके लिए सरकार व स्वयं सेवी संगठनों के माध्यम से पहल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहता है कि महिलाएं सक्षम बनें। इसके लिए किसी भी संगठन को उनके सहयोग की जरूरत होगी वे सलाह से लेकर प्रोजेक्ट में उनकी मदद करने को तैयार हैं। घर में बैठी महिलाओं को घर से निकल कर कुछ ऐसा काम करना चाहिए जिससे वह अपने परिवार को सहयोग कर सकें। राजस्थान में राजविका के करीब ढाई लाख समूह बने हुए हैं। इन समूहों से २७ लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। राजस्थान सरकार ने हाल ही रूमादेवी को राजविका का ब्रांड एम्बेसडर बनाया है।
रूमादेवी ने कहा कि जो महिलाएं सक्षम हैं अपना काम कर रही हैं। वे घर बैठी महिलाओं का सहयोग करें। उनको काम करने के लिए मोटीवेट करें। ऐसी महिलाओं को प्लेटफार्म दिलाने के लिए मदद करें।
फैशन डिजाइनर के तौर पर प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता रूमादेवी ने बाड़मेर से सटे जैसलमेर और बीकानेर के 75 गांवों की 22 हजार महिलाओं को रोजगार प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया है। 2018 में उन्हें नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है। आठवीं तक पढ़ी रूमा देवी ने अपनी पहचान गांव या प्रदेश तक ही नहीं बनाई बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बनाई है। रूमादेवी ने अपने पैशन को फॉलो करते हुए कशीदाकारी में अपना नाम कमाया। रूमादेवी ने अपने जीवन में कई संघर्ष किए, इन्हीं संघर्षों की बदौलत आज इतने बड़े मुकाम पर पहुंच पाई हैं।
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