वाइब्रेंट विलेज योजना के दूसरे चरण में राजस्थान को भी शामिल किया गया है। बॉर्डर के गांव अब सुरक्षा के साथ पर्यटन केंद्र भी बनेंगे। लक्ष्य है सीमा को सुरक्षित, संरक्षित और जीवंत बनाना, जिससे स्थानीय विकास और निगरानी दोनों मजबूत हों।
-रतन दवे
बाड़मेर: केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के द्वितीय चरण में देश के बॉर्डर के गांवों में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही ये गांव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आंख-कान बनेंगे। इन गांवों को सुरक्षित, संरक्षित और जीवंत तीन लक्ष्यों से जोड़ा जाएगा।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत वर्ष 2028-29 तक 6839 करोड़ रुपए व्यय होंगे। इन गांवों में अब एनसीसी कैडेट्स, बीएसएफ, पुलिस और सुरक्षा व राष्ट्रवादी सोच बढ़ाने वाले संगठन और स्वयंसेवी संगठन प्रोत्साहन देंगे। केंद्र सरकार की ओर से वाइब्रेंट विलेज योजना के दूसरे चरण की घोषणा में अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है।
वाइब्रेंट विलेज योजना के पहले चरण में उत्तर भारत को शामिल किया गया था। राजस्थान, पंजाब और गुजरात इसमें शामिल नहीं थे। पत्रिका ने वाइब्रेंट विलेज में राजस्थान सहित पंजाब, गुजरात को शामिल करने को लेकर वाइब्रेंट हो विलेज अभियान चलाया। इसके बाद राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने बाड़मेर दौरे के दौरान इसकी पैरवी की थी।
-पर्यटन सर्किट का विकास
-स्मार्ट कक्षाएं और स्कूलों में कार्यक्रम
-मोबाइल-इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाना
-आजीविका अवसर प्रदान करना
-एनसीसी कैडेट्स को दिखाए बॉर्डर के गांव
वाइब्रेंट विलेज योजना में एनसीसी की ओर से कैडेट्स को बॉर्डर के गांव दिखाए गए हैं। इन गांवों के लोगों से मुलाकात करवाई है। बॉर्डर के लोगों से कनेक्टिविटी बनने के साथ एनसीसी यहां राष्ट्र भावना के लिए भी प्रेरणा का कार्य करेगी।
-आदर्श किशोर, लेफ्टिनेंट, एनसीसी