दिल्ली में सर संघचालक को कहा-पधारो म्हारे देश और मिलने पहुंच गए बाड़मेर

- राष्ट्रीय सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत पहुंचे लोक कलाकार के घर, बढ़ाया मान

By: Dilip dave

Published: 26 Sep 2021, 11:42 PM IST

बाड़मेर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का सीमावर्ती बाड़मेर आगमन अचानक नहीं था, इस की पटकथा शुरू होती है दिल्ली में 2 अप्रेल को हुए संस्कार भारती के केंद्रीय कार्यालय के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम से, जहां पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय कलाकार अनवर खान मांगणियार एक लोक गीत के माध्यम से मोहन भागवत का नाम लेकर उन्हें पधारो म्हारे देश के अपने सुप्रसिद्ध गायन शैली से आमंत्रण देते हैं।
उस कार्यक्रम के पश्चात डॉ. मोहन भागवत पश्चिम राजस्थान के प्रवास पर आने पर उनके घर आने का आमंत्रण स्वीकार करते हैं। मोहन भागवत राजस्थान के अपने संगठनात्मक कार्य की शृंखला में तीन दिन के जोधपुर प्रवास पर आए हैं तो उन्होंने स्मरण रखा कि अनवर खान के घर बाड़मेर जाना है, और अपने कथनानुसार एक दिन के संक्षिप्त प्रवास पर बाड़मेर आ कर अनवर खान मांगणियार से आज उनके घर जाकर उनसे भेंट करने पहुंचे।
जोधपुर से बाड़मेर आकर अनवर खान से भेंट करके सरसंघचालक ने अपना वचन ही नही पूरा किया अपितु यह पारंपरिक लोक भजन गायक कलासाधक का सम्मान भी किया।
डॉ मोहन भागवत अनवर खान के घर लगभग एक घंटा रुके, घर के बाहर से ही ढोल बजाते हुए स्वागत कर उनको घर लाया गया जहां पर अनवर खान ने पारंपरिक वेशभूषा में वारी जाऊ रे, बलिहारी जाऊ रे म्हारा सदगुरु आंगन आया गाकर उनका अभिनंदन किया। सुप्रसिद्ध लोक गायक अनवर खान के साथी कलाकारों, परिवारजनों व उनके शिष्यों से भी सरसंघचालक ने परिचय एवं संवाद किया।

वहीं अनवर खान ने उन्हें पारंपरिक लोकगीत के साथ स्वतंत्रता के 75 वे वर्ष के अमृत महोत्सव के भाव जागरण करने वाले देश भक्ति गीत देश री आजादी रे गीत गुण गाता जाईजो भी सुनाए। डॉ. भागवत ने बाड़मेर सह जिला संघचालक मनोहर बंसल , जोधपुर प्रांत और जयपुर प्रांत से साथ आए अन्य संघ प्रचारकों के साथ अनवर खान के घर अल्पाहार लिया और उनके घर स्थित देवालय में अखंड ज्योति के दर्शन कर पुष्पर्पित किए। तत्पश्चात अनवर खान को शॉल ओढ़ाकर स्मृति स्वरूप चित्र भेंट कर विदा ली।


वचन निभाने आए मोहन - अनवर खान

अनवर खा स्वयं व उनके परिवारजन बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं, उनका कहना है कि इतने बड़े संगठन के मुखिया का ऐसे सहज रुप से मेरे घर आना यह मेरा सौभाग्य है और मेरे लिए आनंद व गौरव का क्षण है और कुछ माह पूर्व मेरे घर आने का अपना वादा पूरा करने के लिए मोहन भागवत मेरे घर आए हैं। हम उनका आभार व्यक्त करते हैं।

Dilip dave Desk
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