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बरसाती पन्नियों के नीचे बैठकर लोगों को न्याय दिला रहे हैं अधिवक्ता

- सालों बाद भी चेंबर की सुविधा नहीं मिली, पक्षकारों के लिए बने शेड में बिजली, पानी की व्यवस्था नहीं

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बरसाती पन्नियों के नीचे बैठकर लोगों को न्याय दिला रहे हैं अधिवक्ता

हरदा. बरसाती पन्नियों की छांव में बैठकर काम करते अधिवक्ता।

हरदा. विभिन्न मामलों में उलझे लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता बरसाती पन्नियों में बैठकर अपना काम करने को मजबूर हैं। उच्च न्यायालय से लेकर शासन-प्रशासन अधिवक्ताओं की इन समस्याओं का समाधान करने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है। बारह महीने परेशानियों के बीच काम करने वाले इन अधिवक्ताओं को चेंबर तक नसीब नहीं हो रहे हैं। पत्रिका ने वकीलों की समस्याओं को कैमरे में कैद कर उनकी पीड़ा को जाना।
104 साल पहले हुई थी न्यायालय की शुरुआत
जानकारी के मुताबिक वर्ष 1919 से न्यायालय की शुरुआत हुई थी। करीब 104 साल में जहां वर्तमान में पंजीकृत अधिवक्ताओं की संख्या 530 है, वहीं पक्षकारों की संख्या भी हजारों में हो गई। लगभग 2 एकड़ 90 डिसमिल में न्यायालय का संचालन हो रहा है। वहीं परिसर में 12 न्यायालय संचालित हो रहे हैं। प्रतिदिन सभी न्यायालयों में लंबित मामलों के पक्षकार आते हैं, लेकिन उन्हें भी बैठने के लिए जगह नहीं है। साथ ही अधिवक्ता भी अभावों में काम कर रहे हैं। न्यायालय परिसर में केवल 36 टीन शेड के चेंबर बने हुए हैं। वहीं बाकी के करीब 150 अधिवक्ता अपनी टेबल, कुर्सी पेड़ों के नीचे अथवा बरसाती पन्नियां लगाकर उसके नीचे बैठकर काम कर रहे हैं। मंगलवार दोपहर 2 बजे भीषण गर्मी में अधिवक्ता गर्मी से हलाकान होने के बावजूद अपने-अपने अस्थायी स्थानों और टीन शेड में लोगों के प्रकरणों से संबंधित कागजातों को पूर्ण करते नजर आए। जबकि अन्य शहरों में वकीलों के लिए चेंबर बनाए गए हैं, किंतु यहां के सैकड़ों अधिवक्ताओं को सालों बाद भी यह सुविधा नहीं मिल पाई है।
पक्षकारों के टीन शेड में बिजली नहीं
अधिवक्ताओं ने बताया कि सालों पहले नगर पालिका ने न्यायालय परिसर में स्थित मंदिर के बाजू से पक्षकारों के लिए टीन शेड का निर्माण करवाया था। किंतु इसमें आज तक बिजली की सुविधा नहीं हुई है, वहीं बारिश के मौसम में क्षतिग्रस्त टीन से पानी टपकता है। अधिवक्ताओं के पास जगह नहीं होने से वे इस टीन शेड में बैठकर काम कर रहे हैं। गर्मी के मौसम में टीन शेड के नीच बैठकर काम करना मुश्किल हो रहा है। ऐसी स्थिति में अधिवक्ता उद्यान में लगे पेड़ की छांव में बैठकर काम निपटाते हैं। न्यायालय के पुराने मौजूद भवन और जिला अधिवक्ता कार्यालय भी जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं।
तीन जगहों पर नहीं लगे वाटर कूलर, केंटीन भी नहीं बनी
वकीलों के अनुसार न्यायालय परिसर में कुछ जगहों पर वाटर कूलर लगे हुए हैं। लेकिन कुर्सी टेबल व पन्नियों के नीचे बैठे सैकड़ों अधिवक्ताओं के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं है। उन्हें प्यास लगने पर बार रूम में जाकर पानी पीना पड़ता है। तीन जगह पर वाटर कूलर लगाए जाने थे, लेकिन अब तक नहीं लगे हैं। इसके अलावा चाय, नाश्ता के लिए केंटीन की सुविधा भी नहीं है। न्यायालय में वकीलों के साथ-साथ पक्षकार वाहन लेकर आते हैं, लेकिन वाहन खड़ा करने के लिए पार्किंग की जगह तक नहीं है।
अधिवक्ता बोले...
न्यायालय परिसर में काम करने के लिए चेंबर तक नसीब नहीं हो रहे हैं, इसलिए पक्षकारों के लिए बने टीन शेड में काम करना पड़ रहा है। मगर इसमें भी बिजली की सुविधा नहीं है। बारह महीने यहां परेशान होते हैं।
रेवाराम पटेल, अधिवक्ता
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लगभग 150 अधिवक्ता पेड़ों की छांव के नीचे या फिर बरसाती पन्नियां लगाकर अपना काम कर रहे हैं। प्रकरणों से संबंधित पक्षकारों को बैठाकर बातचीत करने के लिए भी परेशान होना पड़ता है। सभी वकीलों के लिए चेंबर बनना चाहिए।
ऋषि पारे, अधिवक्ता
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न्यायालय को शुरु हुए सैकड़ों साल हो गए हैं, लेकिन अब तक अधिवक्ताओं के लिए सुविधाएं नहीं हो पाई हैं। खुले में बैठकर काम करना पड़ रहा है। बारिश होने पर छांव के लिए लगाई पन्नियां भी उड़ जाती हैं।
गोपालकृष्ण जगनवार, अधिवक्ता
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चेंबर की सुविधा नहीं मिलने के कारण पक्षकारों के लिए बने टीन शेड में बैठकर काम कर रहे हैं। मगर इसमें भी बिजली की सुविधा नहीं होने से शाम को अंधेरा रहता है, वहीं दिन में गर्मी से परेशान होना पड़ता है। अधिवक्ताओं के लिए सुविधाएं की जाना चाहिए।
विष्णु कौशल, अधिवक्ता
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इनका कहना है
न्यायालय को शुरू हुए करीब 104 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अधिवक्ताओं व पक्षकारों के बैठने के लिए कोई सुविधा नहीं हुई है। रोजाना अधिवक्ता परेशानियों के बीच बैठकर काम करते हैं। वाहनों को खड़ा करने पार्किंग सुविधा भी नहीं है। चाय, नाश्ते के लिए भी केंटीन शुरू नहीं की जा रही है। अधिवक्ताओं के लिए चेंबर सहित अन्य सुविधाएं करने को लेकर कई बार डीजे और हाईकोर्ट को पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन समस्याओं को हल नहीं किया जा रहा है।
अमर यादव, अध्यक्ष, जिला अधिवक्ता संघ, हरदा

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