यहा मेले में प्रेत बाधाओं से मिलती है मुक्ति
बैतूल. जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूर चिचोली तहसील के गांव मलाजपुर में मकर संक्रांति की पहली पूर्णिमा पर भूतों का मेला शुरु होता है, जो महीने भर चलता है। यहां के महंत लोगों की प्रेत-बाधा दूर करते हैं। इससे दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। इसमें आदिवासी समुदाय के लोगों की संख्या अधिक रहती है। बाहरी बाधाओं से मुक्ति का यह मेला सालों से चला आ रहा है। मेले में आए कमलेश यादव, सुखदेव ने बताया मेले में प्रेत बाधा से ग्रसित आने वाले लोगों के हाथों में कभी जंजीर बंधी होती है तो किसी के पैरों में बेडिय़ां होती है। कोई नाच रहा होता है तो कोई अजीब तरह की हरकतें करता है। प्रेत बाधा से पीडि़त व्यक्ति को छोडऩे के बाद उसके शरीर में समाहित प्रेत बाधा समाधि के एक दो चक्कर लगाने के बाद अपने आप उसके शरीर से निकलकर पास के बरगद के पेड़ में उल्टा लटक जाती है। बाद में उसकी आत्मा को शांति मिल जाती है। ऐसी मान्यता है कि 1770 में श्रीश्री देवजी संत गुरु साहब बाबा नाम के एक संत ने यहां जीवित समाधि ली थी। संत चमत्कारी थे और भूत-प्रेत को वश में कर लेते थे। बाबा की याद में हर साल यहां मेले का आयोजन किया जाता है।
गुड़ से तौलने की परंपरा
ऐसी मान्यता है कि जो पीडि़त ठीक हो जाते हैं उसे यहां गुड़ से तौला जाता है। यहां हर साल टनों से गुड़ इक_ा हो जाता है, जो यहां आने वाले लोगों को प्रसाद के तौर पर भी बांटा जाता है। कहा जाता है कि यहां इतनी मात्रा में गुड़ जमा होने के बावजूद मक्खियां या चीटियां नहीं दिखाई देती है। लोग इसे गुरु साहब बाबा का चमत्कार भी मानते हैं।
साइंस भूत-प्रेत नहीं मानता
जिला अस्पताल के मनोवैज्ञानिक डॉ संजय खातरकर ने बताया साइंस में भूत-प्रेत नहीं होता है। मेले में आने वाले लोग किसी न किसी समस्या से ग्रसित हो सकते हैं। उनकी परेशानी मानसिक और शारीरिक दोनों हो सकती है। लोग झाड़ फंूक और कई तरह से इलाज कराते हैं,फिर भी ठीक नहीं होते हैं। इसके बाद इलाज कराने हमारे पास आते हैं और फिर ठीक हो जाते हैं।