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आंगनबाड़ीयों का स्वरूप बदला तो बच्चे भी आने का मचलने लगे

शाहपुरा। आंगनबाड़ी केन्द्रों की बाहरी दिवारों पर चहचहाते बच्चों के चित्र, पेड़ों के दृश्य, भीतर खिलौने, सुन्दर व आकर्षक दरियां, पाठय सामग्री, झूले आदि देखकर बच्चे खुश दिखाई देते हैं। बालकों मचल जाते हैं कि वे यहां कुछ देर खेल खेले। राह से गुजरते लोग भी एक क्षण ठिठक कर दीवार पर तस्वीरों को निहारने से स्वयं को रोक नहीं पाते हैं। यहां के बदले वातावरण से अब बच्चे यहां आने में रुचि लेने लगे हैं। Anganwadis changed their appearance in Bhilwara

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Anganwadis changed their appearance in Bhilwara

Anganwadis changed their appearance in Bhilwara,Anganwadis changed their appearance in Bhilwara

शाहपुरा। आंगनबाड़ी केन्द्रों की बाहरी दिवारों पर चहचहाते बच्चों के चित्र, पेड़ों के दृश्य, भीतर खिलौने, सुन्दर व आकर्षक दरियां, पाठय सामग्री, झूले आदि देखकर बच्चे खुश दिखाई देते हैं। बालकों मचल जाते हैं कि वे यहां कुछ देर खेल खेले। राह से गुजरते लोग भी एक क्षण ठिठक कर दीवार पर तस्वीरों को निहारने से स्वयं को रोक नहीं पाते हैं। यहां के बदले वातावरण से अब बच्चे यहां आने में रुचि लेने लगे हैं। Anganwadis changed their appearance in bhilwara

यह दृश्य है भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा के ग्रामीण अंचल में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्रों का। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने व आकर्षित करने के लिए उपखण्ड अधिकारी श्वेता चौहान ने अनूठी पहल की।

चौहान ने बताया कि तहसील में हाल ही में रात चौपाल में सुनवाई के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों की माली हालत ठीक नहीं होने की शिकायतें मिली है। इसी के तहत खुशी परियोजना की मदद से अरनिया घोड़ा आंगनबाड़ी केन्द्र की मरम्मत करवा, रंगवा कर बच्चों को आकर्षित करने वाली आकृतियां बनाई गई। भामाशाह की मदद से खिलौने आदि भी उपलब्ध करवाए।

आंगनबाड़ी केन्द्रों के बदले स्वरूप को देखकर आम लोगों व बच्चों में खुशी व्याप्त है। इस अनूठी नई पहल को सभी ने सराहना बताया। Anganwadis changed their appearance in Bhilwara

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