
मदद की दरकार: दिनभर फैरी लगाकर 200 रुपए कमाता है पिता, बेटी के इलाज के लिए चाहिए 70 हजार
अभी तो मां के दूध से ही मानवी का पेट भरता है, लेकिन गंभीर बीमारी के चलते मां का दूध भी नहीं पी पाती। आखिर कहां तक भूखे पेट रहेगी यह मासूम। पांच माह तो निकाल दिए। यह सब सोच-सोच कर मानवी के माता पिता की तो बस जान ही नहीं निकल रही। मां तो हमेशा उसे देख-देख कर रोती रहती है।
पिता विनोद कलेजे पर पत्थर रख कर अल सुबह गली मोहल्लों में फैरी लगाकर दरी-चद्दर बेचने निकल जाता है। 200-300 रुपए दिन भर में कमा पाता है। इससे परिवार का खर्चा चल जाता है, फिर बेटी का इलाज कैसे कराए।
एेसे विकट हालात से गुजर रहा है गुजरात से बरसों पहले कोटा में खेड़ली फाटक क्षेत्र में आकर बसा विनोद का परिवार। जिसके पांच माह की बेटी है। बेटी मानवी के दिल में दो छेद है। करीब दो माह पहले बेटी का वजन बढऩा बंद हो गया।
बार-बार जुकाम, पसलियां चलने की शिकायत हुई तो उन्होंने शहर के निजी अस्पताल में बेटी की जांच कराई। यहां डॉक्टर ने बताया कि बेटी मानवी के दिल में दो छेद है। करीब 1 माह पहले डॉ. ने बेटी के ऑपरेशन के लिए 1 लाख का खर्चा बताया था।
विनोद ने जैसे तैसे 30 हजार रुपए तो मुख्यमंत्री सहायता कोष से स्वीकृत करवा लिए, लेकिन अभी भी 70 हजार का जुगाड़ करना है। बेटी के ऑपरेशन के लिए रुपयों की व्यवस्था के लिए विनोद भटक रहा है। दो दिन से मानवी की तबीयत ज्यादा ही खराब है। एेसे में परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया है।
Published on:
18 Jun 2017 09:58 am

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