
काछोला में दिवाली मेले पर खरीदारी करते ग्रामीण युवतियां
काछोला।
पूरे राजस्थान में दीपावली पर काछोला में पांच दिवसीय दीपावली मेला लगता है। दीपावली मेला लगभग 700 वर्षों से भरता चला आ रहा है। काछोला में दशहरा से लेकर शरद पूर्णिमा तक धार्मिक कार्यक्रम होते हैं जो पूरे राजस्थान में ही नहीं अपितु पूरे भारतवर्ष में तीन चार स्थानों में ही होता है। कहा जाता है की भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा से द्वारिका जाते समय तीन दिन काछोला में विश्राम किया और 3 दिनों में अपने भक्तजनों के साथ रासलीला कर धार्मिक नगरी का भाव जागृत किया था।
प्रथम दिन इसी को लेकर काछोला कस्बे में 700 वर्षों से दीपावली का मेला लगता आ रहा है। इसे रास मेले के नाम से जाना जाता है। यह धार्मिक नगरी जब श्री कृष्ण भगवान मथुरा से वृंदावन जाते समय विश्राम किया तब से ही बड़ी धूमधाम के साथ कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह होते हैं आकर्षण का केंद्र मेले में यूं तो हर तरह की दुकानें सजती है। झूला चकरी, मौत का कुआं, सर्कस पांच दिन लगता है। मेला वर्तमान में काछोला कस्बे में दीपावली मेले का शुभारंभ हुआ। यह मेला 5 दिन तक चलता है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य अपने साल भर की रोजमर्रा में काम आने वाली वस्तुओं का संग्रहण किया जाता था लेकिन अब धीरे.धीरे सब तरह की वस्तुएं गांव गांव ढाणी ढाणी मिलने लगी है।
इसलिए मेला धीरे धीरे 15 दिन से घटकर 5 दिन का रह गया। यूं तो गांव शहर शहरों में तरह—तरह की मिठाइयां सजने लगी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में आज भी जलेबी, कलाकंद लड्डू, शक्कर मिश्रित सिंघाड़ा की सेव आदि प्रमुख हैं। ग्रामीण क्षेत्र में लोग आज भी इसे चाव से खाते हैं। सजने लगा दीपावली का रास मेला वर्तमान में इस मेले का आयोजन ग्राम पंचायत बस स्टैंड के पास पंचायत समिति के बाग में मेले में शुरू हो चुका है। दुकानें झूला चकरी सर्कस आदि सज गए हैं।
Published on:
18 Oct 2017 08:06 pm

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