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गणवेश के मामले में प्रशासन से आरपार की लड़ाई को तैयार स्व-सहायता समूह

locationभिंडPublished: Apr 03, 2024 08:37:04 am

Submitted by:

Ravindra Kushwah

सरकारी स्कूलों में गणवेश आपूर्ति के मामले पर स्व-सहायता समूह संगठन और जिला प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। समूहों का दावा है कि हम किसी भी कीमत पर खातों में आई राशि वापस नहीं करेंगे और कलेक्टर कहा कहना है कि निर्णय हो चुका है, पैसा बच्चों के खातों में सीधे दिया जाएगा।

सरकारी स्कूलों में गणवेश आपूर्ति

मप्र डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय, भिण्ड

रवींन्द्र सिंह कुशवाह,भिण्ड. स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अब कानूनी लड़ाई के साथ संगठन स्तर पर आंदोलन तक की तैयारी शुरू कर दी है। समूहों का दावा है कि जिले में संचालित 15 हजार समूहों से जुड़ी करीब 2.25 लाख महिलाओं के हक की लड़ाई में हम पीछे नहीं हटेंगे। महिलाएं एक बस लेकर भोपाल मुख्यमंत्री निवास पर जाकर भी अपनी बात कहेंगी। समूह से जुड़ी महिलाओं ने सोमवार को होली मिलन समारोह में शामिल होने मेहगांव आए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के वाहन को भी रोका और अपनी बात कही। हालांकि चार दिन से चल रही इस कवायद का परिणाम अब तक कुछ नहीं निकला है। महिलाओं का कहना है कि यदि समूहों को गणवेश की आपूर्ति नहीं करनी थी तो हमारे प्रशिक्षण क्यों आयोजित किए गए।
हर साल अप्रेल के अंत तक बंटती है गणवेश
स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि हर साल मार्च के अंत में स्कूल बंद हो जाते हैं। नया सत्र एक अप्रेल से शुरू होता है, इस दौरान गणवेश का वितरण कर दिया जाता था। तीन साल से यही हो रहा था। समूहों के खातों में भी यह पैसा करीब एक साल से पड़ा है इसके पहले किसी ने कभी रोक नहीं लगाई। 14.76 लाख रुपए की गणवेश वितरण होती है। समूहों का दावा है कि 2.46 हजार हजार गणवेश एक गणवेश के हिसाब से 7.38 करोड़ रुपए होता है।
डीपीएम ने हाथ खड़े किए
तीन साल से डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से गणवेश की आपूर्ति की जा रही थी। कलेक्टर ने 25 मार्च को कलेक्टर ने डीपीसी, जिला परियोजना प्रबंधक मप्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन भिण्ड एवं परियोजना अधिकारी डूडा को पत्र लिखकर गणवेश का रंग बदलने की जानकारी एसएचजी के पोर्टल पर भी अपडेट करने को कहा था। समूह की महिलाओं का कहना है कि इससे साबित होता है कि दीदियों के पास गणवेश का आदेश था। डीपीएम ने प्रशिक्षण करावाया। लेकिन अब डीपीएम का कहना है कि कलेक्टर के मौखिक आदेश यह काम रोका गया है और खाते से राशि निकालने पर रोक लगा दी।
त्यागपत्र देकर आएंगी महिलाएं
स्व-सहायता समूह संगठन की जिलाध्यक्ष पम्मी जादौन का कहना है कि वे बुधवार या गुरुवार को भोपाल एक बस लेकर जा रही हैं। वहां से अंतिम निर्णय होने तक नहीं लौटेंगी। सुनवाई नहीं होगी तो त्यागपत्र देकर आएंगी।
फैक्ट फाइल
1.23 लाख बच्चों को दी जानी है गणवेश
2.46 लाख कुल गणवेश होनी है तैयार
300 रुपए एक गणवेश के लिए तय है राशि
7.38 करोड़ रुपए खर्च होता है गणवेश पर।
2 गणवेश एक विद्यार्थी को देने का नियम।
कथन-
-हम किसी भी कीमत पर गणवेश की राशि वापस करने वाले नहीं हैं। गणवेश हमेशा अप्रेल के अंत तक वितरित होती हैं। कलेक्टर ने ही कलर बदलने के साथ 25 जनवरी को एसएचजी के पोर्टल पर इसे अपडेट करने के लिए डीपीसी, डीपीएम एवं पीओ डूड को पत्र लिखा था। हम भोपाल जाएंगे, जरूरत पड़ी तो त्यागपत्र भी देंगे। कई दीदियों के घरों में कलह की स्थिति बन रही है।
पम्मी जादौन, अध्यक्ष स-सहायता समूह संगठन, भिण्ड
गणवेश वितरण की प्रक्रिया चल रही थी, अब हम इसे नहीं देख रहे हैं। कलेक्टर ने मौखिक आदेश से यह राशि समूहों से वापस लेकर बच्चों या पालकों के खातों में डीबीटी कराने को कहा है।
अमृतलाल सिंह, डीपीएम, मप्र डे.-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, भिण्ड।
दिसंबर में डीपीएम ने कोई आदेश दे दिया कि गणवेश बनवाओ, जबकि कलर जनवरी में तय हुआ था। समूहों को कभी कहा नहीं गया, डीपीएम एनआरएलएम की गड़बड़ी है। किसी समूह ने अब तक कोई पैसा खर्च नहीं किया। सप्लायर दु:खी हैं, इसलिए शिकायतें करवा रहे हैं। हमने तय किया कि बच्चों को सीधे पैसे देंगे। निर्णय के लिए न सीइओ अधिकृत, न डीपीएम, हमने निर्णय ले लिया तो सप्लायरों ने 13 एवं 14 मार्च में कुछ सप्लाई कर दी, करना नहीं थी। निर्णय हो चुका है।
संजीव श्रीवास्तव, कलेक्टर, भिण्ड।

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