script साढ़े पांच साल बाद शुरू हुई अधूरी मीटर लैब | Incomplete meter lab started after five and a half years | Patrika News

साढ़े पांच साल बाद शुरू हुई अधूरी मीटर लैब

locationभिवाड़ीPublished: Dec 05, 2023 06:14:38 pm

Submitted by:

Dharmendra dixit

अभी भी उपभोक्ताओं को जाना पड़ रहा अलवर, सिर्फ एक जांच के लिए आई मशीन

साढ़े पांच साल बाद शुरू हुई अधूरी मीटर लैब
साढ़े पांच साल बाद शुरू हुई अधूरी मीटर लैब

भिवाड़ी. पांच साल आठ महीने पहले मीटर लैब खोलने की घोषणा जयपुर डिस्कॉम ने की। कुछ दिन पहले लैब को शुरू किया गया लेकिन आधा-अधूरा। अभी सिर्फ एलटीसीटी उपकरण की ही जांच यहां हो पा रही है। अन्य सभी जांच अलवर में ही हो रही हैं। इस तरह इतनी लंबी अवधि के बाद घोषणा को अमल में लाया गया लेकिन उसका पूरा लाभ स्थानीय उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है।
लैब से करीब 2.70 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलनी है। लेकिन यह योजना जमीन पर लागू होने की अपेक्षा कागजों में सिमटकर रह गई है। निगम द्वारा तैनात किए गए स्टाफ को भी हर महीने लाखों रुपए वेतन दिया जा रहा है। लैब का काम कम होने से इन अभियंता और कर्मचारियों से दूसरी शाखा में काम लिया जा रहा है। विद्युत निगम भिवाड़ी उपखंड के 35 हजार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक अप्रेल 2018 को री स्ट्रकचरिंग के तहत मीटर लैब खोलने के आदेश हुए थे। अब भिवाड़ी सर्किल का गठन हो चुका है, सर्किल के लिहाज से लैब का खासा महत्व होता है। भिवाड़ी क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी देखते हुए चेयरमेन आरजी गुप्ता ने एक अप्रेल 2018 को री स्ट्रकचरिंग के तहत लैब शुरू करने के आदेश दिए थे। लैब शुरू होने के बाद मीटर, सीटीपीटी, एलटीसीटी की जांच यहां होनी थी। अभी तक यह जांच अलवर में होती हैं। कुछ समय पहले ही लैब में एक-दो मशीन आई हैं जिनसे सिर्फ एलटीसीटी की जांच शुरू हो गई है। अन्य जांच के लिए अभी भी उपभोक्ताओं को अलवर जाना पड़ रहा है। इन सभी उपकरणों की जांच औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता को लगाने से पहले करानी होती है। अगर निगम के पास सामान उपलब्ध है तो निगम लगाकर देता है, अगर सामान नहीं है तो उपभोक्ता खरीदेगा और खुद ही जांच कराकर अलवर से लाएगा। अगर ये सामान खराब हो जाए तो उपभोक्ता को दोबारा से जांच करानी पड़ती है। हालांकि निगम ने सामान की जांच के लिए एक वाहन भी लगा रखा है लेकिन अलवर में एक से दो दिन जांच में लगने की वजह से बहुत कम उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलता है। अमूमन उपभोक्ताओं को खुद ही अपने वाहन से अपने सामान की जांच कराकर लानी पड़ती है। विभागीय अभियंताओं के अनुसार लैब में जो उपकरण लगने हैं उनकी लागत भी बहुत अधिक नहीं है। उपकरणों की जितनी कीमत है उससे कई गुना वेतन लैब के लिए नियुक्त अभियंता कर्मचारी अभी तक ले चुके हैं। साढ़े पांच साल लंबे इंतजार के बाद लैब भले ही आधी अधूरी शुरू हुई हो लेकिन अगस्त 2018 से कर्मचारी लगा रखे हैं। एईएन, जेईएन, हेल्पर, तकनीकि कर्मचारी और लिपिक को महीने में दो लाख रुपए से अधिक का वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों को मूल शाखा में काम न होने की वजह से मीटर टेस्टिंग में एसटी और एमआईपी उपभोक्ताओं की जांच कराई जा रही है। इन अभियंताओं के पास नियुक्ति आदेश के अनुसार काम नहीं है।
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लैब का काफी उपयोग
पूर्ण रूप से लैब चालू होने से उपभोक्ता को परेशान नहीं होना पड़ेगा, यहीं जांच हो जाएगी। क्षेत्र के संदिग्ध मीटरों की जांच लैब में हो जाएगी। एसआईपी के नए मीटर की लैब में जांच होती है, तभी उन्हें बड़े उपभोक्ताओं के यहां लगाया जाता है। अभी तक नए मीटरों की जांच अलवर लैब से होती है। अलवर लैब से जांच होने के बाद भिवाड़ी, बहरोड को दिए जाते हैं, लेकिन जांच न होने की वजह से कई बार देर हो जाती है, जिससे उपभोक्ता के कनेक्शन में भी देरी हो जाती है। अगर लैब शुरू हो जाए तो सिंगल फेज के मीटर की जांच भी यहीं शुरू हो जाएगी। भिवाड़ी सर्किल के पौने दो लाख उपभोक्ता हैं, भिवाड़ी उपखंड में राजस्व भी अच्छा मिलता है, इसलिए यहां लैब की जरूरत है।
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लैब में कुछ समय पहले एलटीसीटी की जांच शुरू हो गई है। उसके लिए यहां मशीन आ चुकी हैं। अन्य जांच के लिए मशीन आना शेष है।
रुप ङ्क्षसह गुर्जर, एक्सईएन, एमएंडपी

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