
3 december 1984 : भोपाल गैस त्रासदी का ये है एक बड़ा सच, जिससे सभी अनजान है!
भोपाल/ मध्यप्रदेश के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी आज भी दर्दनाक कहानी के रूप में सुमार है। 1984 की तारीख 3 दिसंबर जब-जब कैलेंडर के पन्नों पर आती है तब-तब ये घाव और भी बढ़ जाता है। जिन्होंने वो भयावाह तस्वीर अपनी आखों से देखें है उनकी आंखें आज भी भर आती हैं। दर्द में महरम लगाने की हर तरह से कोशिश की गई, पर आज भी वहां की आबोहवा में वो जहर के दंश की झलक दिखाई दे रही।
रिपोर्ट के पन्नों में हर साल कुछ न कुछ नये खुलासें होते हैं। तारीख 3 दिसंबर की तस्वीर एक बार फिर उकेरी जाती है। पीड़ितों से फिर सवाल होते हैं, सावल कई है लेकिन जो आज भी आपने घाव को लेकर जिंदगी के दिन गिन रहें और उनके ही घाव का असर परझाई बनकर उनके आने वाली पीढ़ियों पर दिखाई दे रही, इस का इलाज ना हो पाना दर्द देता है।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी Former Prime Minister Rajiv Gandhi के कार्यकाल के पीएमओ से हासिल दस्तावेजों से भोपाल गैस त्रासदी के पीडि़तों को गलत उपचार देने का खुलासा हुआ था। यही कारण है कि त्रासदी के शिकार लोग बीमारियों से ग्रसित हैं और साल-दर-साल पीडि़तों की मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।
पीएमओ के दस्तावेजों से सामने आया है कि इस भयानक भोपाल त्रासदी को दबाने के लिए जो निर्णय लिए गए थे, वे बेहद खतरनाक थे। गैस रिसाव के बाद सरकार ने जर्मनी के डॉ. डॉन बैररो से संपर्क कर उनसे भोपाल के प्रभावित क्षेत्र का मुआयना कराया था।
मृतकों के उत्तकों और पीडि़तों के ब्लड सैंपल के साथ हवा और मिट्टी के नमूनों के परीक्षण में यह सामने आया था कि यूनियन कार्बाइड कारखानेunion carbide factory से निकली जहरीली गैस में साइनाइड भी थी। इसे निष्क्रिय करने के लिए डॉक्टर ने सोडियम थायोसल्फेट का इंजेक्शन दिए जाने की सिफारिश की थी। उनका तर्क था कि इससे पीडि़तों के शरीर में मौजूद साइनाइड के रसायन यूरिन के रास्ते निकल जाएंगे।
गैस त्रासदी का ये भी है एक बड़ा सच
तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने इस सिफारिश को मंजूर कर सोडियम थायोसल्फेट sodium thiosulfate के इंजेक्शन दिए जाने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन एक सप्ताह बाद ही सरकार ने अन्य डॉक्टरों की सलाह का हवाला देकर स्टेरॉयड और ब्रोंकोडायलेटर दिए जाने की सिफारिश कर दी।
तीन महीने बाद ही हालात बिगडऩे पर सरकार ने मार्च 1985 में उपचार को पलट दिया और दोबारा पीडि़तों को सोडियम थायोसल्फेट इंजेक्शन की सिफारिश की गई। अंत में जून 1985 में इसे फिर से बंद कर दिया गया।
भोपाल एक्शन एंड इनफॉरमेशन ग्रुप की अध्यक्ष रचना ढींगरा के अनुसार यह सही है कि उस समय पीडि़तों को सोडियम थायो सल्फेट नहीं दिया गया, यदि उस समय यह दवाई दी जाती तो पीडि़तों के शरीर से जहर का असर कम हो जाता, लेकिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने यूनियन कार्बाइड को बचाने के लिए जानबूझकर दवाएं नहीं दी। 2005 में आईसीएमआर ने अपनी स्टडी में लिखा था कि जिन लोगों को यह दवाई दी गई वे बाद में ठीक हो गए।
सोडियम थायो सल्फेट देने से...
पूर्व डायरेक्टर मेडिको लीगल डॉ. डीके सतपथी बताते हैं कि गैस पीडि़तों को गलत उपचार दिए जाने के पीछे सोची-समझी चाल थी। तंत्र यूनियन कार्बाइड के मालिक एंडरसन को बचाने में लगा था। सोडियम थायो सल्फेट इंजेक्शन दिए जाने से यह खुलासा हो रहा था कि साइनाइड गैस का रिसाव हुआ था।
संभावना क्लीनिक अध्यक्ष सतीनाथ षडंगी ने बताया कि जब हमें पता चला है कि लोगों को यह दवाई नहीं दी गई है तो हमने खुद अपनी क्लीनिक खोलकर 20 दिन तक 1300 लोगों को सोडियम थायो सल्फेट दिया। 7 दिन में ही पीडि़त ठीक होने लगे थे, लेकिन तब हमें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
निरेह डायरेक्टर डॉ. आरआर तिवारी ने बताया कि मैं गैस त्रासदी के समय नहीं था, इसलिए उस समय की स्थिति के बारे में कुछ ज्यादा नहीं जानता, जो रिपोर्ट उपलब्ध हैं उनके मुताबिक गैस पीडि़तों में साइनाइड पाया गया था और ऐसे में सोडियम थायो सल्फेट उसका एंटी डोज है।
Updated on:
01 Dec 2019 12:12 pm
Published on:
01 Dec 2019 12:10 pm

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