पूजा के दौरान इन बातों का रखेंगे ख्याल, नहीं तो पास आ जाएगी गरीबी!

कुछ खास नियमों का पूजा के दौरान पालन किया जाना अतिआवश्यक माना जाता है। अन्यथा माना जाता है कि पूजन का शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं हो पाता है। 


भोपाल। काफी पुराने समय से सुखी और समृद्धिशाली जीवन के लिए देवी-देवताओं के पूजन की परंपरा चली आ रही है। आज भी बड़ी संख्या में लोग इस परंपरा को निभाते हैं। पूजन से हमारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, लेकिन क्या? आप जानते हैं कि पूजा करते समय कुछ खास नियमों का पालन भी किया जाना चाहिए।

भगवान की पूजा का हिन्दू धर्म में खास महत्व है। ऐसे में आज-कल लगभग हर घर में रोजाना पूजा की जाती है। इसके चलते भगवान के प्रति लोगों का अस्था रोजाना बढ़ती जा रही है। 



वहीं आस्था के चलते मंदिर, घरों में भगवान का श्रृंगार, भोग, चढ़ावा आदि का बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है। लेकिन कई बार पूजा करते समय हमसे अनजाने में ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जो कि अशुभ साबित हो सकती है। 

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार भगवान आपकी पूजा से जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं। वहीं आपकी एक गलती उन्हें क्रोधित भी कर सकती है। जिसका दुष्प्रभाव आपको काफी परेशानी में डाल सकता है। और तो और कई बार तो यह गलती आपको गरीबी और हर काम में असफलता की ओर ले जाती है। 




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पंडित शर्मा के अनुसार यदि आपको भी ऐसी परेशानियों से बचना है तो भगवान की पूजा करते समय इन 4 गलतियों को कभी न करें।
1. खंडित दीपक :
पूजा के दौरान घी का दीपक जलाना बहुत ही शुभ माना जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि दीपक टूटा न हो। इससे आपकी पूजा खंडित हो जाएंगी। जिसके कारण आपको शुभ फल के बदले अशुभ फल की प्राप्ति हो सकती है।

2. सुखे फूल :
कभी भी भगवान को सुखे या बासी फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। कई बार होता है कि हम भगवान को फूल या हार चढ़ाते है, लेकिन उसको उतारना भूल जाते है। जो कि आपके लिए अशुभ साबित हो सकता है। इसलिए शाम होने से पहले फूलों-हार को भगवान से हटा लेना चाहिए।

3. खंडित मूर्तियां:
कभी भी घर या मंदिर में खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। अगर घर में कोई खंडित या टूटी मूर्ति हो तो उसे तुरंत ही नदी में प्रवाहित कर दें, या फिर पीपल के नीचे जाकर रख दें।




4. तुलसी की सुखी पत्तियां :
भगवान विष्णु और कृष्ण को तुलसी दल चढ़ाना बहुत ही शुभ होता है। इस प्रसाद के साथ चढ़ाना चाहिए। कई बार होता है कि आप ऐसे ही तुलसी चढ़ा देते है और उसे उठाना भूल जाते है। जिसके कारण वह सूख जाती है। जो कि बहुत ही अशुभ माना जाता है। इसलिए शाम होने से पहले या प्रसाद चढ़ाने के 2-3 घंटे बाद ही उसे उठा लें। 



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यह हैं जरूरी नियम -
पूजा करते समय कुछ खास नियमों का पालन भी किया जाना चाहिए। अन्यथा पूजन का शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं हो पाता है। 
पंडित संतोष शुक्ला के अनुसार कुछ नियमों का सामान्य पूजन में भी ध्यान रखना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने पर बहुत ही जल्द शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।





ये करें-
1. गणेश, विष्णु, दुर्गा, शिव और सूर्य ये आदिपंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है।

2. किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए। दक्षिणा अर्पित करते समय अपने दोषों को छोडऩे का संकल्प लेना चाहिए। दोषों को जल्दी से जल्दी छोडऩे पर मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी।

3. मां लक्ष्मी को विशेष रूप से कमल का फूल अर्पित किया जाता है। इस फूल को पांच दिनों तक जल छिडक़ कर पुन: चढ़ा सकते हैं।

4. शास्त्रों के अनुसार शिवजी को प्रिय बिल्व पत्र छह माह तक बासी नहीं माने जाते हैं। अत: इन्हें जल छिडक़ कर पुन: शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है।


5. आमतौर पर फूलों को हाथों में रखकर हाथों से भगवान को अर्पित किया जाता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। फूल चढ़ाने के लिए फूलों को किसी पवित्र पात्र में रखना चाहिए और इसी पात्र में से लेकर देवी-देवताओं को अर्पित करना चाहिए।

6. पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखकर करनी चाहिए। यदि संभव हो सके तो सुबह 6 से 8 बजे के बीच में पूजा अवश्य करें।

7. पूजा करते समय आसन के लिए ध्यान रखें कि बैठने का आसन ऊनी होगा तो श्रेष्ठ रहेगा।

8. घर के मंदिर में सुबह एवं शाम को दीपक अवश्य जलाएं। एक दीपक घी का और एक दीपक तेल का जलाना चाहिए।

9. पूजन-कर्म और आरती पूर्ण होने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर 3 परिक्रमाएं अवश्य करनी चाहिए।

10. भगवान की आरती करते समय ध्यान रखें ये बातें-
भगवान के चरणों की चार बार आरती करें, नाभि की दो बार और मुख की एक या तीन बार आरती करें। इस प्रकार भगवान के समस्त अंगों की कम से कम सात बार आरती करनी चाहिए।




11. पूजाघर में मूर्तियाँ 1 ,3 , 5 , 7 , 9 ,11 इंच तक की होनी चाहिए, इससे बड़ी नहीं तथा खड़े हुए गणेश जी,सरस्वतीजी, लक्ष्मीजी, की मूर्तियां घर में नहीं होनी चाहिए।

12. गणेश या देवी की प्रतिमा तीन-तीन, शिवलिंग दो,शालिग्राम दो,सूर्य प्रतिमा दो,गोमती चक्र दो की संख्या में कदापि न रखें।

13.  मंदिर के ऊपर भगवान के वस्त्र, पुस्तकें व आभूषण आदि भी न रखें मंदिर में पर्दा अति आवश्यक है अपने पूज्य माता -पिता व पित्रों का फोटो मंदिर में कदापि न रखें, उन्हें घर के नैऋत्य कोण में स्थापित करें।

14. विष्णु की चार, गणेश की तीन,सूर्य की सात, दुर्गा की एक व शिव की आधी परिक्रमा कर सकते हैं।




ये कदापि न करें-
1.  शिवजी, गणेशजी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।

2. मां दुर्गा को दूर्वा (एक प्रकार की घास) नहीं चढ़ानी चाहिए। यह गणेशजी को विशेष रूप से अर्पित की जाती है।

3. सूर्य देव को शंख के जल से अघ्र्य नहीं देना चाहिए।

4. तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोडऩा चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है, तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं।

5. शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं का पूजन दिन में पांच बार करना चाहिए। सुबह 5 से 6 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त में पूजन और आरती होनी चाहिए। इसके बाद प्रात: 9 से 10 बजे तक दूसरी बार का पूजन। दोपहर में तीसरी बार पूजन करना चाहिए। इस पूजन के बाद भगवान को शयन करवाना चाहिए। शाम के समय चार-पांच बजे पुन: पूजन और आरती। रात को 8-9 बजे शयन आरती करनी चाहिए। जिन घरों में नियमित रूप से पांच बार पूजन किया जाता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है और ऐसे घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।



6. प्लास्टिक की बोतल में या किसी अपवित्र धातु( एल्युमिनियम और लोहे) के बर्तन में गंगाजल नहीं रखना चाहिए। गंगाजल तांबे के बर्तन में रखना शुभ माना जाता है।

7. स्त्रियों की और अपवित्र अवस्था में पुरुषों को शंख नहीं बजाना चाहिए। यह इस नियम का पालन नहीं किया जाता है तो जहां शंख बजाया जाता है, वहां से देवी लक्ष्मी चली जाती हैं।

8. मंदिर और देवी-देवताओं की मूर्ति के सामने कभी भी पीठ दिखाकर नहीं बैठना चाहिए।

9. केतकी का फूल शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।

10. दूर्वा (एक प्रकार की घास) रविवार को नहीं तोडऩी चाहिए।

11. तांबे के बर्तन में चंदन, घिसा हुआ चंदन या चंदन का पानी नहीं रखना चाहिए।



12. हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति दीपक से दीपक जलते हैं, वे रोगी होते हैं।

13. बुधवार और रविवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।

14. रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोडऩा चाहिए।

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दीपेश तिवारी
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