MP Election News 2018 : चुनाव से पहले कई नेता कांग्रेस में शामिल, राजनीति में घमासान

चुनाव से पहले कई नेता कांग्रेस में शामिल, राजनीति में घमासान

By: Faiz

Updated: 15 Nov 2018, 02:33 PM IST

भोपालः मध्य प्रदेश में नामांकन वापस लेने की तारीख को बाद जहां सभी राजनीतिक खुलकर चुनावी मैदान में कूद गए हैं। वहीं, चुनाव से महज़ बारह दिन पहले मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) को एमपी में बड़ा झटका लगा है। पार्टी के स्टेट कोऑर्डिनेटर सुनील बोरसे समेत कई नेताओं ने बसपा का दामन छोड़कर कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की मौजूदगी में बसपा के पूर्व नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली।

 

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बोरसे का बसपा पर हमला

बात यहीं खत्म नहीं हुई। जैसे ही राज्य समन्वयक सुनील बोरसे ने कांग्रेस ज्वाइन की उसके बाद उन्होंने बसपा पर जमकर हमलावर रवय्या भी दिखाया। मीडिया बातचीत में पार्टी छोड़ने का कारण बताते हुए बोरसे ने कहा कि, उन्हें अब पार्टी में घुटन मेहसूस होने लगी थी। साथ ही, उन्होंने बसपा के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पर बीजेपी से मिलीभगत करने का आरोप भी लगाया है। वहीं पीसीसी चीफ कमलनाथ ने बाबा साहब के बहाने केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा समय में इन सरकारों की वजह से संवैधानिक संस्थाओं का बटवारा किया जा रहा है। सीबीआई से लेकर सीवीसी तक बंट चुके हैं और जहां तक बात मध्य प्रदेश की है तो यहां भी मूल मुद्दों को भटकाने की लगातार प्रयास किया जा रहा है।

मेदान में कूदे स्टार प्रचारक

आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश में एक चरण में 230 विधानसभा सीटों पर 28 नवंबर को मतदान होना है। इसके लिए सभी पार्टियां पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में डट चुकी हैं। 14 को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख थी, जिसमें पार्टियों नाराज़ होकर नामांकन भरने वाले कई बागी नेताओं ने अपनी उम्मीदवारी वापस ली। हालांकि, कई बाग़ी ऐसे भी थे, जो अपनी शर्तों पर कायम रहने के कारण नाम वापस लेने के लिए राजी़ नहीं हुए, जिनके कारण पार्टियों के बीच कुछ सीटों पर मुश्किलें भी आन खड़ी हैं। इधर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का कहना है कि, 'हमने पार्टी से नाराज सभी नेताओं को मनाकर देमेज कंट्रोल कर लिया है'। वहीं बीजेपी का भी यही तर्क है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा ने हालही में एक साथ उन सभी नेताओं को पार्टी से बाहर किया है, जिन्होंने पार्टी से काफी मान मनौव्वल कराने के बाद भी नामांकन वापस नहीं किया। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं ने अब खुद प्रचार का मोर्चा संभाल लिया है।

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