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एंट्री टैक्स लेकर लगाते रहे चूना, पढ़ें क्या है पूरा मामला……

एक ही फर्म ने की करोड़ों के कंप्यूटर की सप्लाई, आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. धर्णेंद्र जैन का आरोप है कि एंट्री टैक्स की पात्रता उस फर्म को रहती है, जो प्रदेश के बाहर से सामग्री की सप्लाई करती है।

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Widush Mishra

Nov 02, 2015


सागर।
डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में वर्ष-2009 में हुई 200 कंप्यूटरों की खरीदी में एंट्री टैक्स का झोल किए जाने की बात भी सामने आई है। विवि में भोपाल की एक निजी फॅर्म ने कंप्यूटर्स की सप्लाई की थी, लेकिन विवि के अधिकारियों और सप्लाई करने वाले लोगों की मिलीभगत से बिल में एंट्री टैक्स भी जोड़ दिया गया।

गड़बड़ी कर भोपाल की फर्म को पहुंचाया फायदा
आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. धर्णेंद्र जैन का आरोप है कि एंट्री टैक्स की पात्रता उस फर्म को रहती है, जो प्रदेश के बाहर से सामग्री की सप्लाई करती है। लेकिन विवि में 200 कंप्यूटर्स की सप्लाई भोपाल से की गई थी, इसलिए बिल में एंट्री टैक्स जोड़कर विवि से नियम विरुद्ध तरीके से रकम ली गई है।इस तरह की गड़बड़ी कर भोपाल की फर्म को फायदा पहुंचाया गया। लेकिन सीबीआई ने इन बातों को कैसे अनदेखा कर दिया, यह बात हैरान करने वाली है।

क्या सीबीआई ने नहीं देखा अनुबंध?
विवि प्रशासन ने जिस इंडेन फॉर्म के जरिए 200 कंप्यूटर्स की खरीदी का ऑर्डर गुडग़ांव की कंपनी को दिया था, उसमें शर्त के रूप में यह बात बिलकुल स्पष्ट थी कि राशि का भुगतान कंप्यूटर्स की सप्लाई के बाद ही किया जाएगा। लेकिन यह शर्त विवि प्रशासन द्वारा एक ही दिन में की गई कागजी कार्रवाई के कारण इंडेन फॉर्म में ही दबकर रह गई। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि सीबीआई ने विवि प्रशासन और सप्लाई करने वाली फर्म के बीच सप्लाई को लेकर जो शर्तें थीं, उनका सही तरीके से अध्ययन नहीं किया होगा, नहीं तो जांच बंद न करते।

डिमांड नहीं थी फिर भी की खरीदी
सूत्रों का कहना है कि विवि के एक्का-दुक्का विभागों को छोड़ दिया जाए तो अन्य किसी भी विभाग से कंप्यूटर्स की खरीदी के लिए डिमांड नहीं थी। यही वजह थी कि ई-लाइब्रेरी के लिए कंप्यूटर्स की सप्लाई की गई। यहां पर भी लगभग 125 कंप्यूटर खरीदे जाने थे, लेकिन खरीद लिए गए 200 कंप्यूटर। डिमांड के बिना लाखों रुपए की खरीदे होने का यह मामला भी वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसको लेकर पूर्व में पुलिस, ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में शिकायतें भी की जा चुकी हैं।

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