आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. धर्णेंद्र जैन का आरोप है कि एंट्री टैक्स की पात्रता उस फर्म को रहती है, जो प्रदेश के बाहर से सामग्री की सप्लाई करती है। लेकिन विवि में 200 कंप्यूटर्स की सप्लाई भोपाल से की गई थी, इसलिए बिल में एंट्री टैक्स जोड़कर विवि से नियम विरुद्ध तरीके से रकम ली गई है।इस तरह की गड़बड़ी कर भोपाल की फर्म को फायदा पहुंचाया गया। लेकिन सीबीआई ने इन बातों को कैसे अनदेखा कर दिया, यह बात हैरान करने वाली है।