1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अब पीने का पानी भी होगा प्रायवेट, जितना खर्च करेंगे उतना आएगा बिल

जल वितरण और प्रबंधन में जितनी राशि खर्च होगी, उसी के अनुसार वसूली होगी।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भोपाल

•

image

Subodh Kumar Tripathi

•

Updated: 8 Dec 2021, 3:28 PM IST

water-crisis.jpg

Water

भोपाल. प्रदेश के बड़े शहरों में अब पानी भी प्राइवेट हो जाएगा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगमों में पीने का पानी घरों तक पहुंचाने का काम पीपीपी मॉडल पर होगा। जल वितरण और प्रबंधन में जितनी राशि खर्च होगी, उसी के अनुसार वसूली होगी। दरअसल ये शर्तें भारत सरकार ने अमृत-2 योजना में लगाई है। योजना प्रदेश के 408 शहरों में लागू होगी। सरकार अब आम जनता को कोई भी सेवा मुफ्त और सब्सिडी के आधार पर देने के पक्ष में नहीं है। इसके चलते नगरीय निकायों को खुद के स्रोतों से पैसे कमाने और खर्च करने पर जोर दे रही है।

घर-घर लगेगा मीटर

कंपनियां पानी सप्लाई का आकलन करने घर-घर मीटर लगाएगी। मीटर से पानी की सप्लाई होगी। पाइप लाइन के रख-रखाव, जल संरक्षण, बिल वसूली, मीटर लगाने का काम कंपनियां खुद करेंगी। हालांकि सरकार और कंपनियों की कितनी साझेदारी होगी, इसके लिए सरकार नीति तय करेगी।

शिवपुरी खंडवा असफलता के बाद काम बंद
कुछ बड़े निकायों ने पीपीपी मोड पर जल वितरण का काम किया था, पर असफल रहे। प्रयोग के तौर पर इंदौर निगम ने कुछ इलाके में पीपीपी मोड पर पानी सप्लाई और वसूली का काम शुरू किया, लेकिन बाद में कंपनियां काम छोड़कर चली गईं। खंडवा और शिवपुरी नगर निगम ने भी पीपीपी मोड पर जल वितरण की शुरुआत की थी, लेकिन मॉडल सफल नहीं होने के कारण फिर से नगर निगमों ने काम अपने हाथों में लिया। इन दोनों शहरों में पीपीपी मॉडल से जल सप्लाई जेएनएनयूआरएम से शुरू की गई थी। भोपाल में भी जल वितरण के लिए कई इलाकों में घर-घर मीटर लगाए, जो आज तक शुरू नहीं हुए।

यहां धूल को धोने पर निकलता है हीरा, अवैध रूप से चला रहे थे मोबाइल क्रशर

पीपीपी मॉडल से पानी देने की बात करना आसान है, लेकिन लागू करना मुश्किल है। प्रदेश के दो शहरों में यह व्यवस्था लागू हुई थी । निकायों को बाद में इस मॉडल से बैकफुट पर आना पड़ा।
-प्रभाकांत कटारे, सेवानिवृत्त इएनसी नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग