महाभियोग के कारण बचे एमपी-पीएससी अध्यक्ष, आज सीएम से मिलकर देंगे सफाई

- पीएससी पर विवादों का ग्रहण : सीएम कमलनाथ नाराज, अध्यक्ष रखेंगे अपना पक्ष

By: harish divekar

Published: 15 Jan 2020, 11:40 AM IST

भील समाज को आपराधिक प्रवृत्ति का बताने का एमपी-पीएससी का विवाद थामे नहीं थम रहा है। इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ बेहद नाराज हुए। इसके चलते एमपी-पीएससी अध्यक्ष भास्कर चौबे को हटाने की तैयारी हो गई थी, लेकिन नियम आड़े आ गए। दरअसल, जब अध्यक्ष को हटाने के नियम खंगाले गए तो पाया गया कि इसके लिए महाभियोग लाना होगा। एमपी-पीएससी अध्यक्ष को हटाने के लिए संविधान के तहत महाभियोग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इन पेचीदगियों के कारण सरकार ने अध्यक्ष को हटाने का इरादा फिलहाल बदल दिया। अब इस मामले में अध्यक्ष भास्कर चौबे बुधवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस मामले में मुलाकात कर सकते हैं। मुलाकात में वे अपना पक्ष और अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा रख सकते हैं।
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विवादों का ग्रहण लगातार-
दरअसल, लगातार एमपी-पीएससी पर लगातार विवादों का ग्रहण लगा हुआ है। 2020 के पहले भी पीएससी की भर्ती परीक्षाओं में लगातार विवाद गहराता रहा है। यहां तक कि विधानसभा में भी इसका मुद्दा उठ चुका है। इससे पहले स्टेट सिविल सर्विस एक्जाम 2019 का ताजा विवाद है, जिसमें उम्र की गणना 1 जनवरी 2019 से की गई थी, जबकि विज्ञापन दिसंबर 2019 में निकला था। बाद में सरकार को उम्र की गणना 1 जनवरी 2020 से करने का संशोधन करना पड़ा।

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चुनिंदा विवादों पर एक नजर-

- स्टेट सर्विस एक्जाम 2019 के विज्ञापन में उम्र-सीमा का विवाद। इसमें उम्र की गणना 1 जनवरी 2019 से की गई थी। विवाद होने पर बाद में एक साल उम्र-सीमा बढ़ाई गई।

- एमपी-पीएससी की 2018 की भर्ती पर विवाद छाया था। इसमें गलत भर्तियों की शिकायतें। लंबे समय तक पदस्थापना रोकी गई। खूब आंदोलन हुए, फिर पदस्थापनाएं हुई।
- भाजपा सरकार में एमपी-पीएससी से हुई अन्य भर्तियों पर भी विवाद का साया रहा। विधानसभा में भी अनेक बार कांग्रेस ने यह मुद्दा उठाया था। इसमें आवेदन ही गलत होने पर भी नियुक्तियां हुई थी। इस पर खूब बवाल हुआ था।

- 2016 में स्टेट सिविल सर्विस एक्जाम में भी 255 पदों पर भर्ती के समय विवाद छाया था। तब, पीएससी ने अनेक आवेदकों के आवेदन रद्द किए थे। बाद में नियमों पर भी विवाद रहा।

- 2016 की सर्विस एक्जाम में परीक्षार्थियों से परीक्षा केंद्र पर मंगलसूत्र व कलावा उतरवाने पर जमकर बवाल मचा। बाद की परीक्षाओं में भी परीक्षा केंद्रों पर तलाशी को लेकर जब-तब विवाद गहराते रहे।

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रेणु पंत को फिलहाल अभयदान-

एमपी-पीएससी की सचिव रेणु पंत को फिलहाल सरकार नहीं हटा रही है। मामले में पेपर सेटर व मॉडरेटर को नोटिस दिया गया है। इसके अलावा जांच भी बैठा दी गई है। इस कारण फिलहाल सचिव को नहीं हटाया जा रहा है। हालांकि आगे की कार्रवाई सीएम के निर्देश के हिसाब से अध्यक्ष की मुलाकात के बाद तय होगी।

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ये है मौजूदा विवाद-

दरअसल, राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में भील समुदाय को लेकर पूछे गए सवाल के गद्यांश में विवादित अंश है। इसमें भील समुदाय आपराधिक प्रवृत्ति का, शराब के अथाह सागर मे डूबने वाला व अन्य अनैतिक काम करने वाला बताया गया था, जिस पर बवाल मच गया। इस पर भील समुदाय व आदिवासी नेताओं ने भारी नाराजगी जाहिर की थी।

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