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विदेश मंत्री के बाद अब कौन लड़ेगा यहां से चुनाव, सबसे खास है यह लोकसभा सीट

विदेश मंत्री के बाद अब कौन लड़ेगा यहां से चुनाव, सबसे खास है यह लोकसभा सीट

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भोपाल

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Manish Geete

Mar 07, 2019

bjp

विदेश मंत्री के बाद अब कौन लड़ेगा यहां से चुनाव, सबसे खास है यह लोकसभा सीट

भोपाल। लोकसभा चुनाव 2019 पर दुनिया की निगाह लगी हुई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रदेश में अपने-अपने प्रत्याशियों पर विचार कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में फिलहाल 29 सीटों में से 26 सीटें भाजपा के कब्जे में है। जिनमें से कुछ सीटें ऐसी भी हैं जो सबसे खास मानी जाती हैं। इनमें से एक है विदिशा। इसी सीट से विदेश मंत्री एवं विदिशा से वर्तमान सांसद सुषमा स्वराज ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। ऐसे में सबकी निगाह लग गई है कि विदिशा से इस बार कौन।

मध्यप्रदेश की विदिशा सीट भाजपा की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक मानी जाती है। Vidisha Loksabha constituency से वर्तमान में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सांसद हैं। हाल ही में इंदौर दौरे के वक्त उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया था। ऐसी स्थिति में अब सभी की निगाह इस सीट पर लग गई है।

जनसंघ के गढ़ में भाजपा की सीट
Vidisha Loksabha constituency जनसंघ का गढ़ मानी जाती है। यह भाजपा (BJP) के लिए सबसे सुरक्षित सीट है। साल 2009 में सुषमा (Sushma Swaraj) ने जीत दर्ज की थी।

शिवराज सिंह या साधना सिंह
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) इस सीट पर 1991 से 2004 तक पांच चुनावों में जीत हासिल कर चुके हैं। अब इस सीट पर भाजपा की ओर से सबसे मजबूत दावेदार शिवराज सिंह माने जाते हैं। हालांकि चौहान ने सत्ता परिवर्तन के बाद कहा था कि वे केंद्र में नहीं जाना चाहते हैं, वे प्रदेश की जनता के लिए ही काम करना चाहते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह (Sadhana Singh) को इस सीट से उतारा जा सकता है। यदि सुषमा स्वराज की तरह ही भाजपा का कोई अन्य दिग्गज नेता इस सुरक्षित सीट से नहीं खड़ा होता है तो साधना सिंह के उतरने की पूरी संभावना है।

अब तक नहीं लड़ा एक भी चुनाव
शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह ने आज तक एक भी चुनाव नहीं लड़ा है। लेकिन, साधना सिंह शिवराज के पूरे राजनीतिक सफर में हर पल उनके साथ रही हैं।

कई जिलों में है शिवराज का प्रभाव
शिवराज अपने कार्यकाल के दौरान और चुनावी दौरे के वक्त सीहोर, विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद और भोपाल जिले में तीस सालों से सक्रिय हैं। वे इन इलाकों में पदयात्राएं भी कर चुके हैं। जबकि जमीनी स्तर पर जुड़े होने के कारण इनका एक छोटे से कार्यकर्ता तक कनेक्शन है। साधना सिंह भले ही राजनीति में सक्रिय नहीं रही, लेकिन शिवराज के ज्यादातर कार्यक्रमों में और जनसंपर्क में अक्सर ही साथ रहती है। यदि शिवराज चाहेंगे तो साधना सिंह को विदिशा से चुनाव लड़ाया जा सकता है।

एक नजर विदिशा सीट पर
-कांग्रेस 1989 से इस सीट पर हार रही है।पराजित होती आ रही है.
-कांग्रेस इस सीट पर सिर्फ 1980 और 1984 में ही जीत पाई थी।
-विदिशा लोकसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी।
-सन 1967 का चुनाव देश की चौथी लोकसभा के लिए हुआ था।
-सुषमा स्वराज 2009 से लगातार दो चुनाव जीती हैं।
-सुषमा से पहले शिवराज सिंह यहीं से सांसद थे।
-शिवराज ने 1991 का उपचुनाव और उसके बाद लगातार चार चुनाव जीते।
-1991 में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने इस सीट से चुनाव जीता था।
-यह सीट छोड़ी तो शिवराज सिंह का गढ़ बन गई।
-1967 में पहला चुनाव जनसंघ के पंडित शिव शर्मा जीते थे।
-1972 में जनसंघ के टिकट पर प्रसिद्ध अखबार इंडियन एक्सप्रेस और जनसत्ता के मालिक रामनाथ गोयनका चुनाव जीते।
-1977 में यह सीट भारतीय लोकदल ने जनसंघ से छीन ली और राघवजी भाई सांसद बने।
-1980 में कांग्रेस के प्रतापभानु शर्मा ने यह चुनाव जीता।
-1984 का चुनाव भी शर्मा ने जीता।
-बाद में 1989 में राघवजी भाई बीजेपी से चुनाव लड़े और जीते।
-इसके बाद से विदिशा से भाजपा को कोई हटा नहीं पाया।