
madhya pradesh teachers
भोपाल. मध्यप्रदेश में शिक्षकों ( madhya pradesh teachers ) की बहाली तो बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई है। लेकिन शिक्षकों को अपने मूल काम ( school education in india ) से ज्यादा विधायक जी की सेवा ( विधायक के सहायक ) और मालदार विभागों में पोस्टिंग को लेकर ज्यादा रुचि है। एक तो प्रदेश में पहले से ही हजारों शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जो बचे हैं वो स्कूल को छोड़ दूसरी जगह पोस्टिंग करवाने की फिराक में लगे रहते हैं।
प्रदेश में अब सरकारी स्कूल के शिक्षकों की विधायकों के यहां तैनाती की जा रही हैं, जबकि लोक शिक्षण आयुक्त जयश्री कियावत ने पिछले महीने ही गैर शैक्षणिक कार्यों पर रोक लगाकर विभिन्न विभागों में दूसरे काम कर रहे शिक्षकों को लौटने का फरमान जारी किया था, लेकिन विधायकों ने अपने यहां शिक्षकों की तैनाती कर ली।
45 हजार पद हैं खाली
प्रदेश में स्कूली शिक्षा की हालत किसी से छिपी नहीं हैं। 1.35 लाख सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 45 हजार पद खाली हैं, लेकिन मलाईदार काम की तलाश में शिक्षक दूसरे विभागों में पहुंच रहे हैं। अभी तक दस विधायकों के यहां शिक्षक दूसरे काम संभालने पहुंच गए हैं।
इन विधायकों के यहां तैनात हैं शिक्षक
विधायकों के आवास पर शिक्षकों को तैनाती खूब भा रही है। आइए उन विधायकों के नाम आपको बताते हैं, जिनके आवास पर ये शिक्षक तैनात हैं। लीला जैन विधायक गंजबसौदा, मुरली मोरवाल विधायक बड़नगर, दिलीप सिंह गुर्जर विधायक नागदा खाचरौद, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव विधायक सरदारपुर, बिसाहूलाल सिंह विधायक अनूपपुर, फुंदेलाल मार्को विधायक पुष्पाराजगढ़, कमलेश जाटव विधायक अम्बाह, बनवारी लाल शर्मा विधायक जौरा, विजय राघवेंद्र सिंह विधायक बड़वारा।
ऑर्डरों की भरमार
इन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से वापस लौटने के लिए तो कई आदेश दिए गएं लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखता है। लोक शिक्षण संचनालय की आयुक्त जयश्री कियावत ने गैर शैक्षणिक कार्यों पर रोक लगाकर पिछले महीने ही अन्य विभागों में पदस्थ शिक्षकों को मूल विभाग में भेजने के आदेश दिए थे। इसके अलावा मध्यप्रदेश खंडपीठ के जस्टिस शील नागू और जस्टिस अशोक कुमार जोशी ने 10 मार्च 2018 को अर्चना राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिए थे कि सरकार शिक्षकों से कोई भी गैर-शैक्षणिक कार्य न कराएं।
इसी तरह आदिम जनजाति कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक शाह और स्कूल शिक्षा विभाग की तत्कालीन प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने 24 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में न लगाने के आदेश जारी किए थे। शिक्षा विभाग के तत्कालीन सचिव संजय सिंह ने 25 मार्च 2013 और राज्य शिक्षा केंद्र के तत्कालीन आयुक्त आरएस जुलानिया ने 18 दिसंबर 2007 को भी इसी तरह शिक्षकों को गैरशिक्षकीय कार्यों पर रोक लगाई थी।
शिक्षकों की कमी दूर करने का कर रहे प्रयास
वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री प्रभुराम चौधरी ने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के प्रयास कर रहे हैं। उनसे शैक्षणिक कार्य ही कराने के निर्देश हैं। विशेष परिस्थितियों में उन्हें अन्य जिम्मेदारी दी जा रही है। यह परंपरा में हम नहीं बनने देंगे।
शिक्षकों को पीएस रखने का है प्रावधान
समान्य प्रशासन विभाग के मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि विधायकों के यहां निज सहायक पदस्थ किए जाने का प्रावधान है। कुछ विधायक शिक्षकों की पदस्थापना चाह रहे थे, इसलिए उनके यहां पदस्थापना की गई है। हालांकि इस दौरान यह देखा जा रहा है कि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो।
Updated on:
15 Jul 2019 06:39 pm
Published on:
15 Jul 2019 03:53 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
