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चित्रकूट की पयस्विनी और सरयू नदी को बना दिया नाला, एनजीटी ने कलेक्टर को सीमांकन कर अवैध कब्जे हटाने का दिया आदेश

- भगवान राम ने अपने वनवास के 12 साल इन्हीं नदियों के किनारे बिताए थे- अवैध कब्जों और गंदगी डाले जाने से नालों में तब्दील हुई यह नदियां

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भोपाल

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Sunil Mishra

Aug 13, 2021

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दीपावली से पहले 30 नवंबर तक के लिए पटाखे पर बैन लगाया था।

भोपाल। मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित चित्रकूट की दो पवित्र नदियां पयस्विनी और सरयू अवैध अतिक्रमण और लगातार गंदगी डाले जाने के कारण नालों में तब्दील हो गई हैं। इन्हें बचाने के लिए लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कलेक्टर सतना को निर्देश दिए हैं इन नदियों के किनारों का सीमांकन किया जाए और राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार जो भी जमीन सरकारी या नदी के नाम से दर्ज हो उस पर से सभी अवैध कब्जे हटाए जाएं। इसके साथ एमपीपीसीबी को भी नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि इन नदियों में सीवेज और कचरा ना फेंका जाए। इससे इन नदियों के पुनर्जीवित होने की संभावना बढ़ गई है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सेंट्रल जोन बेंच ने नित्यानंद मिश्रा की याचिका पर गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुए यह अंतिम आदेश पारित किया है। याचिका में शिकायत की गई है कि चित्रकूट में सरयू और पयस्विनी नदी और उसके किनारे अवैध कब्जे हो गए हैं। इनमें कई निजी और प्रभावशाली लोगों ने नदी के किनारों पर अतिक्रमण कर निर्माण कर लिए हैं। इसके साथ कुछ धार्मिक आश्रम भी बना लिए गए हैं। कुछ जगह फार्म हाउस और व्यवसायिक गतिविधियों का संचालन भी हो रहा है। यहां से निकलने वाला पूरा अनुपचारित सीवेज और कचरा इन नदियों में फेंके जाने के कारण यह नदियां लगभग विलुप्त हो गई हैं और उनकी जगह केवल नाले बचे हैं। जबकि यह दोनों नदियां चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत से निकली हुई है और बहुत ही पवित्र मानी जाती है। यह माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के लगभग 12 साल इन नदियों के किनारे ही गुजारे हैं। इनकी लंबाई मुश्किल से 20 से 30 किलोमीटर तक ही है। यह दोनों नदियां चित्रकूट के रामघाट पर आकर मंदाकिनी नदी से मिल जाती हैं। लेकिन अब जहां यह नदियां मिलती हैं उसके बाद से मंदाकिनी नदी के पानी का रंग स्पष्ट काला नजर आने लगता है। क्योंकि सरयू और पयस्विनी नदी में नालों की गंदगी ही आ रही है। एनजीटी ने सतना नगर निगम और कलेक्टर को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि इन नदियों के मामले में पर्यावरणीय नियम-कानूनों का पालन हो। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई के साथ अनिवार्य रूप से पर्यावरण क्षति हर्जाना वसूलने के लिए कहा है।