सिस्टम की नाकामी के कारण यहां मौत के बाद भी नहीं मिलता सुकून, देखें वीडियो

मध्यप्रदेश के कई जिलों में सिस्टम की नाकामी की वजह से मौत के बाद भी नहीं मिलता सुकून, बारिश के मौसम में मौत होने पर होती है बड़ी परेशानी...

By: Shailendra Sharma

Published: 29 Aug 2020, 10:13 PM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश में विकास के तमाम दावों को धता बताने वाली मानवता को शर्मसार कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। ये तस्वीरें हमारे सिस्टम की उस लाचारी की हैं जिनका खामियाजा ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। अपनों को खोने का गम झेल रहे लोग कैसे सिस्टम की नाकामी झेलते हैं इसकी तस्वीरें इस बार राजगढ़ जिले के बाल्यापुरा गांव और दतिया के जिला मुख्यालय से सटे हमीरपुर गांव में देखने को मिलीं। ऐसा नहीं है कि ऐसे हालात सिर्फ इन दो जगहों पर ही हैं बल्कि ऐसे और भी कई गांव हैं जहां बारिश के मौसम में लोग भगवान से यही प्रार्थना करते हैं किसी की भी मृत्यु न हो।

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चद्दर लगाकर किया अंतिम संस्कार
वैसे तो गांवों के विकास के दावे तमाम नेता करते हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे कितनी अलग होती है इसकी तस्वीर आप खुद देखिए..ये तस्वीर मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के बाल्यापुरा गांव की हैं। जहां श्मशान घाट तो है लेकिन चिता जलाने के लिए एक टीन शेड तक नहीं लगाया गया है। शनिवार को गांव में हुई मांगीबाई नाम की महिला की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार करने में परिजन को नौ घंटे का वक्त लगा। वजह थी श्मशान घाट में टीन शेड का न होना। सुबह 6 बजे मांगीबाई का देहांत हो गया था जिसके बाद परिजन बारिश थमने का इंतजार करते रहे, बारिश नहीं थमीं तो ऑटो में शव को लेकर कच्चे रास्ते से श्मशान घाट पहुंचे जहां खुले आसमान के नीचे अंत्येष्टि करने में भी ग्रामीणों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। शव के साथ साथ गांव से ही टीन शेड, बरसाती (पन्नी) को तानकर बारिश से बचाने का इंतजाम किया गया और तब कहीं जाकर वृद्धा का अंतिम संस्कार हो पाया। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से बारिश के मौसम में अंत्येष्टि करना चुनौती बना हुआ है लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरंपच-सचिव से कई बार इस समस्या को बताया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। गांव के ही एक युवक ने अब वीडियो बनाकर कलेक्टर से गुहार लगाई है। पत्रिका से बात करते हुए कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया है कि वो जिम्मेदारों से इस संबंध में जानकारी लेंगे और अभी तक श्मशान घाट में टीन शेड क्यों नहीं बना है इसकी जानकारी मिलने के बाद नियमानुसार दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

 

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गांव में नहीं मुक्तिधाम, तिरपाल डालकर हुआ अंतिम संस्कार
दतिया जिला मुख्यालय से सटे हमीरपुर गांव में तो मुक्तिधाम ही नहीं है। यहां जब भी किसी की मौत होती है तो उसका घर के पीछे ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है। शनिवार को गांव में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो जाने पर परिजनों को घर के पीछे तिरपाल डाल कर अंतिम संस्कार करना पड़ा। ग्राम पंचायत डगरई के अंतर्गत आने वाले ग्राम हमीरपुर की आबादी करीब दो हजार है। इसके बावजूद शासन - प्रशासन यहां मुक्तिधाम नहीं बनवा पाया है। मृतका के नाती जगदीश प्रजापति एवं ग्रामीण बाबूलाल अहिरवार ने बताया कि गांव में मुक्तिधाम बनवाने के लिए कई बार मांग की जा चुकी है लेकिन आज तक मांग पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार मुक्तिधाम न होने से किसी का निधन होने पर अंतिम संस्कार के लिए काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। ग्राम पंचायत सचिव राजेंद्र राय का कहना है कि गांव में मुक्तिधाम बनाने के लिए जमीन नहीं मिली है। सचिव के अनुसार जो सर्वे नंबर पूर्व में मुक्तिधाम के लिए स्वीकृत हैं उन पर एससीएसटी वर्ग के लोग मकान बना कर रह रहे हैं।

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