संघ की रा. बैठक : पहले जय शाह पर आरोप सिद्ध करें, उसके बाद हो जांच कार्रवाई, संघ प्रमुख ने दिया राष्ट्रवाद का सबक

sanjana kumar

Publish: Oct, 13 2017 11:40:43 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
संघ की रा. बैठक : पहले जय शाह पर आरोप सिद्ध करें, उसके बाद हो जांच कार्रवाई, संघ प्रमुख ने दिया राष्ट्रवाद का सबक

RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की मुख्य बैठक गुरुवार से शुरू हो गई। पहले ही दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रवाद के सबक दिए, जय शाह का मामला


भोपाल। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी की संपत्ति कथित तौर पर 16 हजार गुना बढऩे को लेकर लग रहे आरोपों पर राष्ट्र्रीय स्वयंसेवक संघ ने चुप्पी तोड़ी है। संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने गुरुवार को कहा, आरोप लगाने वालों को पहले आरोप साबित करना चाहिए।

पहली नजर में अगर कोई मामला बनता है, तभी जांच जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका यह बयान एेसे समय आया है जब इस मुद्दे पर कांग्रेस लगातार हमलावर है। संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में शामिल होने के लिए भोपाल आए होसबोले ने केरल में संघ कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों पर पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वैचारिक तौर पर हारे लोग हमले कर रहे हैं। होसबोले ने बताया, बैठक में कामकाज की समीक्षा और आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। राजधानी के शारदा विहार स्कूल परिसर में हो रही इस बैठक के दौरान संघ के हाल ही में दिवंगत हुए पदाधिकारियों एवं पत्रकार गौरी लंकेश को श्रद्धांजलि दी गई।

जोशी और सिन्हा पर किनारा

दत्तात्रेय ने वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा के मुद्दे पर किनारा कर लिया। मीडिया के सवालों पर दत्तात्रेय बोले- जोशी भोपाल में भागवत से मिलने हमारे काम से आए थे। भाजपा की जो बात उन्हें करना है, वे भाजपा में करेंगे। सिन्हा को लेकर भी दत्तात्रेय ने यही कहा कि वे भाजपा में बात करेंगे, संघ से क्यों करेंगे। दत्तात्रेय ने कहा, देश संक्रमण काल से गुजर रहा है। त्योहारों से लेकर भारत माता तक पर कुछ लोग अभद्रता कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।


इधर आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की मुख्य बैठक गुरुवार से शुरू हो गई। पहले ही दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रवाद के सबक दिए। संघ विस्तार को पहली प्राथमिकता रखने और संघ के मूल सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करने की बात कही गई। संघ कार्यकर्ताओं पर हमले के जिक्र पर चुनौती के बावजूद संघ विस्तार का संदेश दिया गया। बैठक में पहले दिन आधा दर्जन प्रांतों ने अपने कामकाज का हिसाब व आगामी कार्ययोजना बताई। राजधानी के शारदा विहार स्कूल परिसर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बैठक का शुभारंभ किया। सबसे पहले भैय्याजी जोशी ने बैठक का प्रारूप बताया। देश में संघ से जुड़ती युवा-शक्ति को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। मुख्य बैठकों का दौर 14 अक्टूबर तक चलेगा।

गौरी लंकेश को श्रद्धांजलि

संघ और संगठन में बीते छह महीने में जिन बड़े नेताओं का निधन हुआ उनको बैठक की शुरुआत में श्रद्धांजलि दी गई। इसमें पत्रकार गौरी लंकेश भी शामिल है। हाल ही में बैंगलोर में गौरी की हत्या कर दी गई थी। गौरी धार्मिक कट्टरता के खिलाफ लिखती थी।

मध्यप्रदेश में काम अच्छा

सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मीडिया को कहा- मध्यप्रदेश में संघ का काम शुरू से अच्छा है। मध्यप्रदेश ने संध को अनेक प्रमाणिक कार्यकर्ता दिए। होसबाले ने कहा- संघ के कुटुम्ब प्रबोधन का महत्व समझने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की एक पुस्तक पढऩी चाहिए।

पहले योग , बैठक की शुरुआत

बैठक में मंच पर महज भागवत व भैय्याजी जोशी रहे। बाकी सभी नीचे जमीन पर गद्दों पर बैठे। मंच पर गोबर से लीपे गए टाट का पर्दा बैकग्राउंड में था, जबकि सभी के जूते-चप्पल बाहर ही उतरवा लिए गए। आकस्मिक चिकित्सा के लिए अलग अस्थाई टेंट लगाया गया था। बैठक की शुरुआत में योग कराया गया। भागवत के समीप ही तांबे के बर्तन में पीने का पानी रखा था। धरोहर नाम से प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें संघ नेताओं व संस्कृति को दिखाया गया है।

संघ का यूं विस्तार

2015 की तुलना में 2016 में 48 फीसदी युवा बढ़े
2017 में 52 फीसदी युवा आरएसएस से ज्वाइन हुए
20 से 35 साल की उम्र के युवा जुड़े। गणना जनवरी से जून तक
550 शाखाएं बीते एक साल में बढ़ी
34000 शाखाएं हर दिन व 15 हजार साप्ताहिक मिलन संचालन
49493 स्थानों पर शाखा व मिलन कार्यक्रम
1600 शाखा व 1700 साप्ताहिक मिलन में वृद्धि
450 गांवों में ग्राम विकास-कुटुम्ब प्रबोधन से बदलाव लाए

स्वयंसेवकों को हॉफ-पेंट ही पसंद
संघ ने अपनी ड्रेस को हॉफ-पेंट से फुल-पेंट कर दिया है, लेकिन अनेक स्वयंसेवकों को अभी भी हॉफ-पेंट ही पसंद है। गुरुवार को संघ की मुख्य बैठक के पहले दिन स्वयंसेवक खाकी हॉफ-पेंट में नजर आए।

इन मुद्दों पर मंथन
देश की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति। शिक्षा, घुसपैठ, आंतरिक सुरक्षा, माओवाद, भाषा, संस्कृति, केरल-पश्चिम बंगाल में संघ कार्यकर्ताओं पर हमले, विस्तार, रोहिंग्या मुसलमान व बांगलादेशी शरणार्थी, कश्मीर, विदेश नीति, सामाजिक समरसता, गौरक्षा और अन्य सम-सामयिक मुद्दे।

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