scriptState's first agricultural market statues | प्रदेश की पहली आइटी कृषि मंडी बदहाल | Patrika News

प्रदेश की पहली आइटी कृषि मंडी बदहाल

locationभोपालPublished: Dec 01, 2023 08:08:24 pm

भोपाल. प्रदेश की पहली आइटी कृषि मंडी, करोद के हाल भी मेेंटेनेंस के अभाव में नब बहार सब्जी मंडी जैसे नजर आ रहे हैं।

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गुरुवार की सुबह मंडी में इतनी कीचड़ हो रही थी के लोगों का चलना मुश्किल हो रहा था। चबूतरे से बाहर सडक़ पर सब्जी बेचने वाले कीचड़ में भी सब्जिया रखकर बैठे हुए थे। जबकि परिसर की पूरी सडक़े सीमेंट कांक्रीट की बनी हुई है। इसके बाद भी कीचड़ हो गई थी। इससे साफ नजर आता है कि मार्केट में निरतंर झाडू़ नहीं लगती है। इतना ही नहीं यहां के सबसे बड़े कचरा जमा करने के यार्ड के अंदर तो कचरा भरा था। यार्ड के बाहर भी कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए थे। कचरा उठाने का कंटेनर तो था,लेकिन खाली पढ़ा था।
यार्ड के बाहर लग रहे ढेर: कृषि मंडी के अलग-अलग ब्लॉकों के बाहर कचरा जमा करने के लिए यार्ड बनाए हुए है। हाल यह था कि यार्ड के बाहर ही कचरे के ढेर पड़े हुए थे। यहां खाली प्लाटों पर पढ़ा कचरा पहले ही दिक्कत बना हुआ है। संख्ती सिर्फ मंडी परिसर की दीवारों पर तो चेतावनी तक सीमित है।
कचरे से खाद बनाने की योजना भी ठप
तीन साल पहले कचरे से खाद, गैस बनाने के लिए लगा बायोगैस प्लांट लम्बे समय से बंद पड़ा हुआ है। हरा व गीले कचरे का खाद बनाने में उपयोग ही नहीं हो रहा है। बताया गया कि जब यह चल रहा था तो भी इसकी क्षमता मंडी से निकलने वाले हरे कचरे के हिसाब से दस फीसदी ही थी। ठेका कंपनी से व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद के चलते कई महिनों से यह बंद पड़ा है।
मंडी की सफाई व्यवस्था ठेके पर है। हरे कचरे के लिए बायोगैस प्लांट है। कचरा उठाने की आधी दिक्कत तो मवेशी पूरी पूरी कर रहे है। दर्जनों की संख्या में मवेशी मंडी परिसर इसी लिए छोड़े जाते हैं।यार्ड में दिन भर रहते हैं। सब्जियों का अधिकांश कचरा वहीं खाते है। जो कचरा खाने के योग्य नहीं होता है, उसे आसपास फैला भी देते। लोगों का कहना है कि पुरानी मंडी में तो सडक़, जर्जर स्ट्रेक्चर की दिक्कत थी। यह मंडी तो नई बनी हुई है। व्यवस्था तो ठीक से जिम्मेदारों को करना चाहिए।
मंडी में सफाई व्यवस्था शुरू से ठेके पर चल ही है। सफाई निरंतर होती है। कचरा यार्ड के बाहर नहीं डालने दिया जाता है। बारिश होने से जरुर थोड़ी गीला हुआ होगा। अन्यथा मंडी में सफाई व झाड़ू बराबर लगती है। आरके जैन, सचिव, कृषि मंडी, भोपाल

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