वैभव की गिरफ्तारी पर कलेक्टर के बादशाही आदेश का काला चिट्ठा, देखें वीडियो

पत्रिका के पास जो दस्तावेज है और वैभव ने जो बताया, सुनिए उसी की जुबानी...।

By: Amil Shrivas

Published: 11 Nov 2017, 02:00 PM IST

बिलासपुर . जिस वैभव शास्त्री को 48 घंटे जेल में बिताने पड़े, उसे जेल में रखने के लिए पुलिस के पास आधार ही नहीं था। कलेक्टर ने गिरफ्तारी के आदेश कर आरक्षक के हवाले कर दिया। आरक्षक एसपी के पास लेकर गया तो यह तय करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी कि आखिर किस आधार पर गिरफ्तार करें। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस फार्मासिस्ट वैभव की शिकायत पर कलेक्टर पी. दयानंद ने पहले गलत तरीके से दवा बेच रहे मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई की थी, आखिर क्या वजह हुई कि उसी फार्मासिस्ट को गिरफ्तार करने के आदेश कलेक्टर ने दे दिए। पत्रिका के पास जो दस्तावेज है और वैभव ने जो बताया, सुनिए उसी की जुबानी...।
मैं वैभव शास्त्री पिता रमेश चंद्र शास्त्री बिलासपुर जिले का निवासी हंू। मैंने 2014 में जेके कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी से बी फार्मेसी पास किया है। मैं एक फार्मासिस्ट होने के नाते 2012 से ही बिलासपुर जिले में अवैध रुप से चल रहे मेडिकल स्टोर्स जो फॉर्मासिस्ट की अनुपस्थिति में चल रहे मेडिकल स्टोर्स है उसकी शिकायत और दवा माफियाओं, नशीली दवाओं की शिकायत करते आ रहा हंू।

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6 अक्टूबर 2017 को नशीली दवाओं के कारोबार और फॉर्मासिस्ट की अनुपस्थिति में चल रहे मेडिकलों की शिकायत करने गया था। कलेक्टर महोदय के जनदर्शन कार्यक्रम में जैसे ही मैंने लेटर दिया मुझे गिरफ्तार करवाने आरक्षक से कहने लगे कलेक्टर महोदय। उसी समय हमारे कुछ मीडिया कर्मी वीडियो बनाने लगे। उन्हें फटकार लगाई गई और वीडियो बनाना बंद कर बाहर करने कहा गया। आरक्षक के साथ मुझे एसपी साहब के पास भिजवा दिया गया। एसपी साहब ने मेरा लेटर देखकर टीम बनाकर कार्यवाही करने कहा। आरक्षक ने तब एसपी से कहा कि कलेक्टर साहब ने इन्हें गिरफ्तार करने कहा है। तब कुछ देर एसपी साहब सोचने लगे कि किस जुर्म में इसको गिरफ्तार करने कह रहे है? तब मुझे बाहर बैठने कहा गया। थोड़े देर बाद एसपी साहब का मैसेज मिला कि मुझे नीरज चंद्राकर सर के पास भेजा जा रहा है। सिविल लाइन थाने से कुछ पुलिस मुझे लेने आ रहे है। नीरज चंद्राकर सर को भी कुछ समझ नहीं आया कि मुझे क्यों गिरफ्तार करने को कहा जा रहा है। उन्होंने भी मुझे बाहर बैठने को कहा।

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थोड़ी देर में सिविल लाइन थाने से पुलिस ने आकर मुझे लेकर थाने में बैठा दिया। उसके बाद एक गिरफ्तारी वारंट लाया गया जिसमें धारा 151 लिखा था। धारा के बारे में पुलिस वालों से पूछने पर पता चला कि मैंने कलेक्टर के साथ अभद्र व्यवहार और कलेक्टर परिसर में हंगामा किया। इस तरीके से मुझे प्रकरण बताया गया जबकि मैं शांतिपूर्ण तरीके से जनदर्शन में कलेक्टर महोदय को दवा कालाबाजारी विक्रय की शिकायत करने गया था। पर मुझे और मेरे परिवार के साथ अन्याय किया गया। मुझे जमानत न देकर सीधे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। ४८ घंटे रखने के बाद भी मुझे जमानत नहीं दिया जा रहा था। मुझे मानसिक प्रताडि़त किया गया। अब मैं भय की जिंदगी जी रहा हूं। जमानत होने के बाद भी मेरा पीछा करते हुए पुलिस घर तक गयी। मुझे मेरे परिवार वाले कहीं आने-जाने नहीं दे रहे हैं। सभी भय में हैं। लगता है कोई पीछा कर रहा है। मैं सभी मीडिया का आभारी हंू। स्पेशल रूप से पत्रिका का जिन्होंने मुझ बेगुनाह को पुलिस और प्रशासन से छुड़वाने दबाव बनाया। बार-बार किसी बड़े साहब का हवाला दिया जा रहा था कि उनके कहने पर मुझे जमानत नहीं दी जा रही है। मैं बिलासपुर वासियों से निवेदन करता हंू कि मेरा साथ दे रहे इस लड़ाई में मेरा लड़ाई जारी रहेगा। हमेशा सत्य के साथ रहा और सत्य की जीत जरूर होगी।
कलेक्टर न मिले, न फोन उठाया : इस मामले में पत्रिका के रिपोर्टर ने कलेक्टर से मिलने की कोशिश की लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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वकील का भी कहना- गिरफ्तारी का आधार नहीं : वैभव शास्त्री के वकील का भी कहना है कि एक तो गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है। दूसरे इतना बड़ा मामला नहीं था कि कोर्ट में पेश किए बिना वैभव को 48 घंटे तक जेल में रखा जाए। जबकि नियमानुसार आरोपी को गिरफ्तारी का कारण बताने के साथ ही 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करने का नियम है। कोर्ट के आदेश पर ही जमानत पर रिहा या फिर जेल भेजा जा सकता है।

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IMAGE CREDIT: patrika
Amil Shrivas
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