Exercise benefits: महिलाएं, परिवार के हर सदस्य के स्वास्थ्य व अन्य जरूरतों का खयाल रखती हैं, लेकिन वे अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाती हैं। सही मायनों में महिला सशक्तीकरण के लिए उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और प्रोत्साहित भी किया जाना चाहिए। जीवन के हर पड़ाव पर वे किन बातों का ध्यान रखें, जानिए-
Exercise benefits: महिलाएं, परिवार के हर सदस्य के स्वास्थ्य व अन्य जरूरतों का खयाल रखती हैं, लेकिन वे अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाती हैं। सही मायनों में महिला सशक्तीकरण के लिए उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और प्रोत्साहित भी किया जाना चाहिए। जीवन के हर पड़ाव पर वे किन बातों का ध्यान रखें, जानिए-
किशोरावस्था : सही दिनचर्या का पालन करें
इस उम्र में अच्छा पोषण व नियमित योग-व्यायाम से अधिक उम्र में भी दिक्कतें नहीं होती। हाई प्रोटीन डाइट लें। कई रिसर्च में पाया गया है कि इस उम्र में करीब 50 फीसदी लड़कियां एनीमिया से ग्रसित होती हैं। ऐसे में पालक, चुकंदर जैसी आयरन रिच ड़ाइट अधिक लें। मासिक धर्म और हाइजीन की सही जानकारी दी जाए। इनका भी रखें ध्यान: डिब्बाबंद व प्रोसेस्ड फूड न लें। सोडा, कोल्ड ड्रिंक, एल्कोहल न लें।
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युवावस्था : परिवार संग सेहत का ध्यान रखें
मातृत्व सुख के साथ ही परिवार की भी जिम्मेदारी होती है, अत: खुद पर भी ध्यान दें। प्री मेरिटल और प्री कंसेप्शनल काउंसलिंग कराएं। सुरक्षित गर्भनिरोधक साधनों की जानकारी रखें। बांझपन के बारे में मिथ्याओं से बचें और विशेषज्ञ से खुलकर बात करें। प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद भी सेहत का ध्यान रखें।
प्रौढ़ावस्था : शारीरिक-मानसिक बदलाव होते
मेनोपॉज के कारण कई तरह के शारीरिक-मानसिक बदलाव होते हैं। इस उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस, कई तरह कैंसर, मासिक धर्म की अनियमितता, गर्मी के बफारे, जोड़ों में दर्द, वजन बढऩा आदि समस्याएं हो सकती हैं। अत: कम उम्र से ही व्यायाम करें। पेप स्मीयर टेस्ट, हड्डियों की जांच व मेमोग्राम डॉक्टर की सलाह से कराएं।
वृद्धावस्था : चीनी-नमक व कैफीन वाली चीजें कम लें
इस समय हाइ बीपी, अल्जाइमर्स, मधुमेह जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नियमित डॉक्टरी परामर्श व स्वास्थ्य जांच करवाएं। इस समय आपको ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिसमें शुगर और कैफीन की मात्रा कम हो, प्रोटीन की मात्रा अधिक हो और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार का सेवन करें।
इन आयुर्वेदिक उपायों को भी अपनाएं
एनीमिया: इसको पांडू रोग भी कहते हैं। इसमें आंवला, चुकंदर, अनार, पालक, पिपली का चूर्ण शहद या मिश्री के साथ लें। लौह भस्म, पूनर्नवा मंडूर या कुछ अवलेह भी ले सकते हैं।
पीसीओडी: मीठा व तैलीय चीजें कम और सलाद, अंकुरित चीजें अधिक खाएं। रोज दालचीनी की चाय पीएं। गुनगुने पानी में नींबू का रस व दशमूल का काढ़ा 10 एमएल बराबर पानी से लें।
यूरिन में संक्रमण: जिन्हें बार-बार यूरिन में संक्रमण होता है, उन्हें शहद या मिश्री के साथ आंवला चूर्ण सुबह-शाम लेना चाहिए। रात में साबुत धनिया भिगो दें व सुबह उबालकर पीएं।
अनियमित माहवारी: आहार में गुड़, आंवला, सरसों का साग, दालें, मोटा अनाज, चावल का मांड आदि अधिक मात्रा में लेना चाहिए।