Yoga Benefits: सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते अर्थात् दुख-सुख, लाभ-हानि, शत्रु-मित्र, शीत-उष्ण आदि द्वन्द्वों में सर्वत्र समभाव रखना योग है, यह श्रीमद्-भगवदगीता में कहा गया है। इससे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। योग को लेकर अब तक यह भ्रांति रही कि यह बुजुर्गों या धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए है, लेकिन पिछले एक दशक में लोगों को योग का महत्त्व समझ में आया है। अब हर कोई इसे अपना रहा है।
Yoga Benefits: सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते अर्थात् दुख-सुख, लाभ-हानि, शत्रु-मित्र, शीत-उष्ण आदि द्वन्द्वों में सर्वत्र समभाव रखना योग है, यह श्रीमद्-भगवदगीता में कहा गया है। इससे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। योग को लेकर अब तक यह भ्रांति रही कि यह बुजुर्गों या धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए है, लेकिन पिछले एक दशक में लोगों को योग का महत्त्व समझ में आया है। अब हर कोई इसे अपना रहा है।
इसलिए मन नहीं होता...
एक ही आसन में कुछ देर रुके रहने में कई लोग बोरियत महसूस करते हैं। हालांकि इसकी खासियत तो यही है ही, साथ ही इसके फायदे भी अधिक होते हैं। दूसरा, सांस पर ध्यान न रखना। इसे अक्सर लोग योग और व्यायाम करते समय भूल जाते हैं, जबकि यह योग का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। ये ही योग को व्यायाम से अलग करते हैं।
ऐसे बचें बोरियत से
इसके लिए चार बातों का खयाल रखें-
1. शुरुआत सूर्य नमस्कार से करें। अधिकतर लोग इसे जानते हैं।
2. हर दिन एक जैसे आसन करने के बजाय वेरिएशन ट्राइ करें।
3. जब भी आप योग करें तो लाइट म्यूजिक लगा लें। मन भी शांत रहेगा।
4. अकेले योग न करें। किसी ग्रुप के साथ करेंगे तो बोरियत महसूस नहीं होगी। निरंतरता बनी रहेगी।
इन योग से करें शुरुआत
1. सूर्य नमस्कार कर सकते हैं। हल्के आसन या सूक्ष्म व्यायाम से इसकी शुरुआत करें।
2. गर्मी में चन्द्र नमस्कार कर सकते हैं। इससे शरीर भी ठंडा रहता है।
3. आसन भले ही चार-पांच करें, लेकिन दो-तीन तरह के प्राणायाम पांच-पांच मिनट करें। प्राण ऊर्जा को बढ़ाएगा और ऊर्जावान बनाएगा। इससे फीलगुड वाले हार्मोन्स एक्टिव होते हैं।
ये गलतियां करने से बचें
ब्रीदिंग: योग में सांस पर ध्यान देना जरूरी है। अंदर लेने और बाहर छोडऩे के क्रम को याद रखें।
पॉश्चर: योग में शरीर के पॉश्चर का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। सही पॉश्चर से अधिक फायदा होता है।
दृष्टि: जब कोई व्यक्ति दृष्टि, सांस और शरीर पर ध्यान नहीं देगा तो सजगता शून्य होगी। उसका लाभ नहीं मिलेगा।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।