
भरपूर नींद से बढ़ता है आत्मविश्वास, अल्जाइमर से भी मिलती है मुक्ति
नींद आखिर किसे प्यारी नहीं है। और जब पता चले कि सोने के ढेर सारे फायदे हैं, तो बस बात ही क्या। क्या आप जानते हैं कि दिमाग की सफाई के लिए एक अच्छी नींद बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जब हम सो रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग अपने भीतर जमे टॉक्सिंस के कचरे को साफ कर रहा होता है। यही वजह है कि सोने के बाद हम खुद को तरो- ताजा महसूस करते हैं यानी पूरे दिन दिमाग में जो कैमिकल लोचा होता रहता है, उसे हमारे सोने के बाद से ही हमारा दिमाग साफ करना शुरू कर देता है। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि अगर आप ठीक ढंग से नहीं सोते है, तो आप भूलने और कई तरह की दिमागी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।
गंदा दिमाग, घटाता याददाश्त
जब हम सोते हैं तो दिमाग पूरे दिन के जमे कचरे को साफ करता है। यह साफ न हो तो अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी होती है। सफाई के बाद शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, इसीलिए जब हम उठते हैं तो फ्रेश महसूस करते हैं।
ये है भरपूर नींद के फायदे :-
वजन रहेगा संतुलित
कम सोने वालों का वजन भरपूर सोने वालों से ज्यादा होता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि पांच घंटे की नींद लेने वाले लोगों में भूख बढ़ाने वाला हार्मोन 15 फीसदी अधिक बनता है। वहीं आठ घंटे की नींद लेने वाले लोगों में यह हार्मोन सामान्य मात्रा में ही बनता है। हार्मोन के बढ़ने से लोग ज्यादा खाते हैं और मोटापे का शिकार होते हैं। पर्याप्त नींद लेने का सकारात्मक असर याद्दाश्त पर भी पड़ता है। 8 घंटे की नींद सोने वाले लोग सीखी हुई चीजों को अच्छी तरह से याद रख पाते हैं। जबकि देर रात तक काम करने वाले लोगों की सोचने की क्षमता कम हो जाती है।
बढ़ती है कार्यक्षमता
गहरी नींद से सोकर उठने पर आप स्वयं को तरोताजा तो महसूस करते ही हैं, साथ ही शरीर में रोगों से लड़ने वाली कोशिकाएं भलीभांति काम करती है। जिससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। भरपूर नींद सोने वालों में सर्दी जुकाम और अल्सर जैसी बीमारियां भी कम होती हैं।रात में गहरी नींद लेने के बाद दूसरे दिन जो चुस्ती एवं ताजगी महसूस होती है वह किसी टॉनिक के सामान होती है। इससे आपकी कार्यक्षमता बढती है और आप बेहतर काम कर पाते है। आप भी अपनी कार्यक्षमता बढ़ाना चाहते है, तो अच्छी नींद लीजिए।
मानसिकता पर पड़ता है प्रभाव
बच्चों की मानसिकता पर प्रभाव पर्याप्त नींद न लेने से किशोरों में डिप्रेशन और आत्मविश्वास की कमी आ जाती है। आठ घंटे से कम नींद लेने वाले किशोरों में सिगरेट और शराब की लत ज्यादा पाई जाती है। साथ ही कम नींद लेने वाले विद्यार्थी बात-बात पर उग्र होकर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। जबकि पर्याप्त नींद लेने वाले किशोर इन सब से दूर रहते है।भरपूर नींद लेने वालों में बढती उम्र के कई लक्षण पाए जाते है। एक शोध में यह पाया गया कि प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद लेने वाले 4.5 घंटे से कम सोने वालों की तुलना में लम्बी उम्र जीते हैं।
Published on:
30 Oct 2018 12:36 pm

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