
बुलंदशहर. उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों का भविष्य किस तरह संवारा जा रहा है, यह देखेंगे तो आपका भी सिर शर्म से झुक जाएगा। प्रतिमाह 50 हजार रुपये तक का वेतन पाने वाले शिक्षक यहां पांचवीं के बच्चों को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल का नाम दूर उनके माता—पिता का नाम लिखना तक नहीं सिखा रहे हैं। इतना ही नहीं स्कूल में पढ़ा रही एक अध्यापिका से जब प्रदेश के राज्यपाल का नाम पूछा गया तो वह भी नहीं बता सकी। यह हाल बुलंदशहर जिले के खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव दीनौल स्थित सरकारी स्कूल का है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। बच्चों को बैग, यूनिफार्म, किताब, मिड डे मील, बिल्डिंग, शौचालय और शिक्षकों के वेतन आदि पर यह खर्च हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद देश के भविष्य को संवारने के स्थान पर खानापूर्ति की जा रही है। अभिभावकों का आरोप है कि खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव दीनौल स्थित सरकारी स्कूल में शिक्षक तो हैं, लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी ठीक ढंग से नहीं निभा पा रहे हैं। क्योंकि यहां पढ़ने वाले चौथी और पांचवीं के बच्चे न तो प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल का नाम जानते हैं और न ही अपने माता—पिता का नाम ही लिख पाते हैं। जब बच्चों से सवाल पूछे गए तो वे शिक्षक का मुंह ताकते नजर आए। इतना ही नहीं स्कूल में पढ़ा रही एक अध्यापिका से जब प्रदेश के राज्यपाल का नाम पूछा गया तो वह भी नहीं बता सकी। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह देश के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।
इधर इस स्कूल और कक्षा की दुर्दशा देख ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने इसको लेकर स्कूल के अध्यापकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि अध्यापक सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। उनका काम सिर्फ बच्चों को पास करना है चाहे उन पर कुछ आए या न आए। जब बच्चे पांचवी पास कर लेंगे तो यहां से उनकी टीसी काट दी जाएगी और इस तरह शिक्षकों की जिम्मेदारी पूरी हो जाएगी।
Published on:
11 Apr 2018 10:50 am
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