
पेट्रोलिंग से लेकर युद्ध तक में भारतीय सेना का साथ देती है ये कारें
नई दिल्ली: पुलवामा अटैक के बाद पूरा देश गुस्से में है हर कोई अपने जवानों की शहादत का बदला चाहता है। हम भले ही अपने घरों में बैठकर नारे लगाते हुए दुश्मन से बदला लेने की बात कहते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि देश की रक्षा में तैना त इन जवानों का बॉर्डर पर सच्चा साथी कौन होता है। हथियारों के बाद सेना के वाहन सेना के सबसे मददगार साथी होते हैं। पेट्रोलिंग से लेकर युद्ध के मैदान तक में ये कुछ खास वाहन सेना का साथ निभाते हैं। खास फीचर से लैस ये कारें न सिर्फ इंडियन आर्मी की शान बढ़ाती हैं, बल्कि ये हर बुरे मौसम और कठिन रास्तों को मात देने में भी माहिर होती हैं। तो चलिए आपको उन खास वाहनों के बारे में बताते हैं जो सेना की शान माने जाते हैं।
टाटा सफारी- टाटा सफारी स्टार्म सेना की मुख्य गाड़ियों में से एक है। सफारी से पहले जिप्सी सेना की ड्यूटी में तैनात थी। 90 के दशक से सेना लगातार जिप्सी की कई यूनिट्स ऑर्डर करती रही हैं। इन कार का ज्यादातर यूज बॉर्डर के करीब होता है। इसके अलावा सेना अन्य कई जगहों पर भी इसका इस्तेमाल करती है।
जोंगा-
जोंगा मतलब जबलपुर ऑर्डनेंस एंड गनकैरेज एसेंबली। निसान द्वारा बनायी गयी इस कार को सेना की जरूरतों के हिसाब से मॉडीफाई किया गया था। इसे ऑफ- रोड टास्क के लिए तैयार किया गया था। सेना ने इसका इस्तेमाल पैट्रोलिंग और अन्य अहम मिशनों में खूब किया है। 1963 में शामिल की गई इस कार की आखिरी यूनिट को 2009 में सेना ने अलविदा कह दिया। अब यह सिर्फ भोपाल स्थित मेमोरियल में नजर आती है।
विलीस जीप-
युद्ध के दौरान विलीस जीप भारतीय सेना की अहम साथी बनी रही। इस कार का इस्तेमाल अधिक ऊंचाई वाले और ठंडे इलाकों में सबसे ज्यादा होता था। युद्ध के दौरान यह सेना का अहम ट्रांसपोर्ट बन जाता था
टाटा सूमो- युद्ध और इमरजेंसी के हालात में टाटा सूमो सेना के बेहद काम आती है। सालों से सेना के बेड़े में शामिल यह कार पथरीले और पहाड़ी रास्तों पर चलने में माहिर है। सेना की मेडिकल टीम इस गाड़ी पर सबसे ज्यादा भरोसा करती है। वहीं सेना की टुकड़ी को युद्ध के मैदान तक लाने ले जाने में ये कार सबसे ज्यादा यूज की जाती है।
Published on:
16 Feb 2019, 3:01 PM IST
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