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फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में दाखिले हासिल करने का कथित मामला गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष पहुंचा है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार और एडमिशन कमिटी फॉर प्रोफेशनल मेडिकल एजूकेशन कोर्सेस (एसीपीसीयूजीएमईसी) को नोटिस जारी कर इस मामले में स्पष्टता करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई रखी है। प्राची शाह के साथ-साथ गुजरात डोमिसाइल पैरेन्ट्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए गुजरात का डोमिसाइल होना अनिवार्य किया है, इसलिए दाखिले के लिए डोमिसाइल की अनिवार्यता का उचित ढंग से पालन किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा पता चला है कि कई विद्यार्थियों ने मेडिकल कोर्स में दाखिला लेने के लिए एडमिशन कमिटी के समक्ष फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्र पेश किया है।
वकील हेमांग परीख और वकील ममता व्यास की ओर से मार्फत याचिकाओं में दलील दी गई है कि कुछ विद्यार्थियों ने राजस्थान सहित अन्य राज्यों के साथ-साथ गुजरात में मेडिकल कॉलेज में दाखिले का दावा पेश किया है। यह भी पता चला है कि सूरत शहर में कई फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। इस तरह फर्जी डोमिसाइल के आधार पर विद्यार्थी गुजरात के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले रहे हैं। राज्य सरकार व एडमिशन कमिटी को दाखिले के समय डोमिसाइल प्रमाणपत्र के साथ-साथ इसके लिए जरूरी संलग्न सबूतों की भी
जांच करनी चाहिए जिससे डोमिसाइल की वैधता का पता चल सके।
डोमिसाइल प्रमाणपत्रों के साथ सबूत भी पेश किया जाना चाहिए जिससे किसी तरह का अवैध कार्य नहीं हो सके और इस तरह दाखिले की प्रक्रिया पारदर्शी हो सके। फर्जी डोमिसाइल के आधार पर दाखिले से राज्य के प्रतिभावान व होनहार विद्याॢर्थयों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। ऐसा नहीं करने से मेरिट लिस्ट प्रभावित होगी और इससे बच्चों का भविष्य खराब हो सकता है।
इस मामले में राज्य सरकार का कहना है इतने सारे विद्यार्थियों के डोमिसाइल को लेकर सबूत की जांच करना संभव नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायालय ने इस संबध में राज्य सरकार व कमिटी से और ज्यादा स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
Published on:
07 Jul 2018 05:16 pm

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