मधुमक्खियों संभालेंगी मोर्चा, दूर भागेंगे गजराज

मधुमक्खियों की मदद से अनिकट्टई के निकट पलमलई व वेल्लामारी में हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीणों को राहत मिलेगी

By: Arvind Mohan Sharma

Published: 07 Jun 2018, 02:12 PM IST

कोयम्बत्तूर. जंगली हाथियों के घुसने से तहस-नहस हो रही फसलों को बचाने के लिए और किसानों के लिए व्यापार की बेहतर संभावनाओं की तलाश में मधुमक्खियों की मदद ली जाएगी। इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुएगन्ना प्रजनन संस्थान कोयम्बत्तूर के वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट के आदिवासी ग्रामीणों को मधुमक्खियों के 80 छत्ते सौंपे हैं।माना जा रहा है कि मधुमक्खियों की मदद से अनिकट्टई के निकट पलमलई व वेल्लामारी में हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीणों को राहत मिलेगी। वन विभाग को सूचित करने के बाद वैज्ञानिकों ने दो माह पहले मोत्तियूर व पसुमनि पुदूर में मधुमक्खियों के 50 छत्ते दिए थे।एक वैज्ञानिक ने बताया कि पिछले साल आदिवासियों से संपर्क कार्यक्रम के दौरान पता चला कि आए दिन जंगली हाथियों के फसल तहस नहस कर देने के कारण ग्रामीण जीविकोपार्जन के लिए चिंतित हैं। जंगली हाथी आए दिन उनके खेतों में घुसकर फसल चौपटकर चले जाते हैं जिसकी वजह से तंगहाली में जी रहे किसानों की मुसीबत बढ़ जाती है।

 

 

मधुर महक वाले ढेर सारे जंगली फूल है जिनकी वजह से हाथी यहां खिंचे चले आते हैं
पता चला कि इन इलाकों में मधुर महक वाले ढेर सारे जंगली फूल है जिनकी वजह से हाथी यहां खिंचे चले आते हैं। इसलिए हमने इलाके में मधुमक्खियों के पालन का निर्णय लिया। क्योंकि हाथी मधुमक्खियों की भनभनाहट से भयभीत हो जाते हैं और मधुमक्खियों की मौजूदगी वाले इलाके में नहीं घुसते। मधुमक्खियों के पालन का एक अन्य फायदा यह है कि आदिवासी और किसान उनके छत्ते शहद निकालकर बेच सकते हैं इससे उनकी आर्थिक स्थिति ठीक होगी। गन्ना प्रजनन संस्थान के निदेशक ब शीराम ने योजना को मंजूरी दे दी है।एक वैज्ञानिक ने बताया कि इसके बाद ईरोड़ में एक किसान का मधुमक्खियों के छत्ते का आर्डर दिया गया। उनका कहना था कि मधुमक्खियों को रात में दिखाई नहीं देता इसलिएवे रात को छत्ते से बाहर नहीं जातीं। ऐसे में यह बेहद आवश्यक था कि उन्हें रात में ही ईरोड़ से पश्चिमी घाट के जंगली इलाकों में भेजा जाता। मधुमक्खियां बेदह संवेदनशील होती हैं और वे स्थान परिवर्तन के बारे में जान जाती हैं। दो माह पहले जब मधुमक्खियों का छत्ता पलमलई पहुंचा तो मधुमक्खियों ने मोर्चा संभाला और जंगली हाथियों की इन इलाकों में घुसने की हि मत नहीं हुई। योजना की सफलता से उत्साहित वैज्ञानिकों ने अब इसे वेल्लमसारी में भी मधुमक्यिों का छत्ता लगाने की तैयारी की है। एक वन अधिकारी के अनुसार योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल तक गर्मियों के मौसम में एक माह के दौरान पांच हाथी गांव में घुस आते थे लेकिन इस साल ऐसी कोई शिकायत फिलहाल नहीं मिली है।एक वैज्ञानिक के अनुसार आदिवासियों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जाएगा कि वे छत्ते को नुकसान पहुंचाए बिना शहद कैसे निकाल सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इन इलाकों से निकाली गई शहद की बाजार में अच्छी मांग होगी क्योंकि मधुमक्खियां आदिवासी गांवों के जंगली फूलों से पराग निकालेगी और शहद बनाएगी।

Arvind Mohan Sharma Desk
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