कुत्तों का आतंक, 12 दिनों में लग गए 150 इंजेक्शन

आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ती जा रहीं हैं

By: prabha shankar

Published: 14 May 2019, 07:00 AM IST

छिंदवाड़ा. मई की चिलचिलाती धूप भरे 12 दिनों के अंदर जिला अस्पताल में 150 रैबीज के इंजेक्शन श्वान पीडि़तों को लगा दिए गए, लेकिन आवारा कुत्तों का आतंक गली-मोहल्लों से कम नहीं हो सका है। नगर निगम की कार्यशैली कहीं से भी आम आदमी को राहत नहीं दे पा रही है। कैचर टीम अभी भी संसाधनों का अभाव का रोना रो रही है।
हाल ही में भोपाल में एक मासूम को आवारा कुत्तों के शिकार बनाने की घटना से भी नगर निगम ने सबक नहीं लिया है। हम पहले भी बता चुके हैं कि पिछले एक साल में आवारा श्वान नियंत्रण कार्यक्रम में तय 78 लाख रुपए में से आठ लाख रुपए भी खर्च नहीं किए गए। निगम की एजेंसी भुगतान न होने के चलते कई बार डॉग कैचिंग का काम छोड़ चुकी है। वर्तमान में उसे मजदूर, डॉक्टर और ट्रैक्टर की कमी के साथ बजट के संसाधन से जूझना पड़ रहा है। इसके चलते एजेंसी के मजदूर गली-मोहल्लों में नजर नहीं आ रहे हैं। इससे आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ती जा रहीं हंै।

प्रतिदिन 10 से 12 लोग बन रहे शिकार
जिला अस्पताल के आंकड़ों को देखा जाए तो एक से लेकर 12 मई तक 150 रैबीज इंजेक्शन पीडि़तों को लगाए जा चुके हैं। इससे प्रतिदिन का औसत 10 से 12 पीडि़तों का आता है, जिन्हें घायल अवस्था को देखते हुए एक से पांच इंजेक्शन लगाए जाते हैं। पीडि़त बता रहे हैं कि सुबह और शाम के समय सर्वाधिक श्वान काटने की घटनाएं हो रहीं हैं।
ससुर को काटा तो बहू ने की शिकायत
हाल ही में सर्वोत्तम नगर से एक बुजुर्ग गुजर रहे थे तो आवारा कुत्ते ने काट लिया। इसकी शिकायत विवेकानंद कॉलोनी में रहने वाली बहू ने सीएम हेल्पलाइन में की। उनके मुताबिक क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक है, जिन्हें पकडकऱ बाहर किया जाना चाहिए। इससे पहले वर्धमान सिटी में आवारा कुत्तों के घूमने की शिकायत हुई थी, जिस पर नगर निगम की टीम पहुंची थी।
ऐसे में कैसे मिले राहत
निगम की डॉग कैचर टीम कहीं से आवारा श्वानों को पकड़ती भी है तो उसका बधियाकरण व वैक्सीनेशन कर उसे वहीं छोड़ देती है। ऐसे में सवाल यह है कि ऐसे में शहरवासियों को राहत कैसे मिलेगी।

इनका कहना है
जिला अस्पताल में एक मई से 12 मई तक 150 रैबीज इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। आवारा श्वान गर्मी में विशेष परिस्थितियों के चलते लोगों को ज्यादातर शिकार बनाते हैं। इसका हर किसी को ध्यान रखना चाहिए।
-डॉ.सुशील दुबे, आरएमओ जिला अस्पताल

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