script पीजी कोर्स शुरु होते ही मिले जाएंगे 57 जूनियर डॉक्टर | 57 junior doctors will be available as soon as PG course starts | Patrika News

पीजी कोर्स शुरु होते ही मिले जाएंगे 57 जूनियर डॉक्टर

locationछिंदवाड़ाPublished: Feb 05, 2024 05:33:04 pm

छिंदवाड़ा। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने छिंदवाड़ा के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में पीजी पाठ्यक्रम को संबद्धता दे दी है। यह निर्णय कार्य परिषद की बैठक में लिया गया। जिसकी मांग कार्य परिषद के सामने रखी गई थी, फैकल्टी के आधार पर शुरुवात में 57 सीट दी गई है जो आने वाले समय में बढ़ेगी। निर्णय के बाद एमबीबीएस छात्रों का पोस्टगे्रज्युएट (पीजी) कोर्स में दाखिले हो सकेंगे तथा वह एमडी व एमएस बन सकेंगे और कोर्स के दौरान मेडिकल कॉलेज को जूनियर डॉक्टर मिल जाएंगे।

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इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस
छिंदवाड़ा। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने छिंदवाड़ा के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में पीजी पाठ्यक्रम को संबद्धता दे दी है। यह निर्णय कार्य परिषद की बैठक में लिया गया। जिसकी मांग कार्य परिषद के सामने रखी गई थी, फैकल्टी के आधार पर शुरुवात में 57 सीट दी गई है जो आने वाले समय में बढ़ेगी। निर्णय के बाद एमबीबीएस छात्रों का पोस्टगे्रज्युएट (पीजी) कोर्स में दाखिले हो सकेंगे तथा वह एमडी व एमएस बन सकेंगे और कोर्स के दौरान मेडिकल कॉलेज को जूनियर डॉक्टर मिल जाएंगे।
- कोर्स की पोस्टग्रेजुएट सीटों की संख्या
कोर्स सीट
जनरल सर्जरी 03
ओबीजी 05
एनेस्थिसियोलॉजी 03
आप्थेमोलॉजी 01
माइक्रोबॉयोलॉजी 03
पैथोलॉजी 03
बायोकेमेस्ट्री 05
फार्माकोलॉजी 03
फॉरेंसिक मेडिसिन 05
जनरल मेडिसिन 04
फिजियोलॉजी 04
एनाटमी 05
फिजियाट्री 02
पीडियाट्रिक 02
रेस्पीरेटरी मेडिसिन 01
आर्थोपेडिक 04
टर्मेटोलॉजी 01
कम्युनिटी मेडिसिन 03
- पैरामेडिकल कोर्स की यूनिवर्सिटी थ्योरी परीक्षा में 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य
इंटरनल और यूनिवर्सिटी थ्योरी के नम्बर से बनेगी मेरिट, 50 प्रतिशत से कम अंक आने पर होंगे फेल
छिंदवाड़ा। पैरामेडिकल डिप्लोमा और डिग्री कोर्स को लेकर मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर की कार्य परिषद ने बड़ा निर्णय लिया है। फिजियोथेरेपी कोर्स को छोडकऱ अन्य सभी पैरा मेडिकल कोर्स में उत्तीर्ण अंक तो 50 प्रतिशत ही रहेंगे पर विद्यार्थियों को यूनिवर्सिटी थ्योरी परीक्षा में 40 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। मेरिट इनटरनल थ्योरी के अंक को मिलाकर बनेगी। अभी तक यूनिवर्सिटी थ्योरी परीक्षा के अंक को लेकर अनिवार्यता नहीं होने से विद्यार्थी कम अंक पाने के बाद भी इनटरनल थ्योरी के अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण हो जाते थे।

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