
छिंदवाड़ा. स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा कर ‘गुरुजी’ की नौकरी पाने का मामला प्रकाश में आया है। शिकायत मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल ने मामले में जांच शुरु करा दी है। हालांकि शिकायत के दो हफ्ते बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। दरअसल एक आरटीआई कार्यकर्ता ने आरटीआई के जरिए यह मामला उजागर किया है। इसके बाद मामले की जांच के लिए ज्ञापन जनसुनवाई में दिया। जिला शिक्षा अधिकारी को भी मामले से अवगत कराया। मामला परासिया विकासखंड से जुड़ा हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि वर्ष 1997 में शासन की शिक्षा गारंटी योजना चल रही थी। आरोपी ने टोले में 20 ऐसे बच्चों के नाम दिए जो पहले से ही आसपास के प्राथमिक स्कूल में अध्ययनरत थे। इसके बाद पंचायत के प्रस्ताव से वह ‘गुरुजी’ के पद पर नियुक्त हो गया और कागजों में विद्यार्थियों को अध्यापन कराने लगा। वर्ष 1997 से 2016 तक ऐसे ही चलता रहा, लेकिन कोई जांच नहीं हुई। वर्तमान में आरोपी सहायक शिक्षक के पद पर छिंदवाड़ा विकासखंड में पदस्थ है।
खाते में छात्रवृत्ति की आती थी राशि
फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले ‘गुरुजी’ कागजों में बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं थे। उन्होंने बच्चों के नाम पर बकायदा छात्रवृत्ति भी ली है। दरअसल उस समय छात्रवृत्ति की राशि सीधे शिक्षक के खाते में आती थी और फिर शिक्षक छात्रों को देते थे।
ऐसे हुआ मामला उजागर
आरटीआई कार्यकर्ता मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि मैंने गांव के आसपास के प्राथमिक स्कूल से आरटीआई के जरिए दाखिल खारिज एवं अटेंडेंस रजिस्टर की जानकारी ली। इसके बाद जिन विद्यार्थियों के नाम पर गुरुजी ने नौकरी पाई थी, उनसे बात की। विद्यार्थियों ने गुरुजी के मार्गदर्शन में अध्ययन करने की बात से इंकार कर दिया। वहीं रजिस्टर में भी एक ही वर्ष में अलग-अलग स्कूलों में विद्यार्थियों के नाम एक ही मिले।
इनका कहना है…
फर्जी तरीके से शिक्षक के नौकरी पाने की शिकायत मिली है। मैं उसकी जांच करा रहा हूं। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
जीएस बघेल, डीईओ, छिंदवाड़ा
Published on:
27 Jul 2024 12:10 pm
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