
वन्यजीवों के आवास और स्थानीय समुदाय के बीच संतुलन की दृष्टि से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व ने छिंदवाड़ा जिले के तामिया और जुन्नारदेव के 23 गांवों को इको सेंसेटिव जोन बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन के समक्ष रखा है। टाइगर रिजर्व के पत्र के आधार पर प्रशासन ने गांवों के नक्शे, आबादी समेत अन्य जानकारी संग्रहित करना शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार टाइगर रिजर्व का बफर जोन पहले ही तामिया-जुन्नारदेव के 27 गांवों पर है। अब इनकी सीमा एक किमी दूर तक इको सेंसेटिव जोन में बदली जा जाएगी। इनमें जुन्नारदेव विकासखण्ड के आल्मोड़ा, सांगाखेड़ा समेत 7 गांव तथा तामिया के देलाखारी, झिरपा समेत 16 गांव शामिल है।
इको सेंसेटिव जोन का मकसद टाइगर रिजर्व के बफर एरिया के आसपास के नाजुक पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा करना है। इको-टूरिज्म और डेवलपमेंट को करता है। जिससे वन्यजीवों के आवास और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन बना रहे। टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से लगभग 1079.43 वर्ग किमी का इको-सेंसिटिव ज़ोन प्रस्तावित है। इनमें छिंदवाड़ा जिले का कुछ हिस्सा शामिल किया जाना है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, विविध भू-संसाधनों और मानव प्रभाव से अछूते जंगलों को समेटे हुए है।
इस इस समय सतपुड़ा टाइगर रिजर्व हो या फिर पेंच नेशनल पार्क में बाघ, तेन्दुआ, सियार, भालू समेत अन्य वन्य जीवों की आबादी लगातार बढ़ रही है। इससे ये आबादी क्षेत्र में आ रहे हैं। प्रतिदिन कहीं न कहीं कोई न कोई घटनाएं सुनने को मिल रही है। ऐसे में इको सेंसेटिव जोन बनाया जा रहा है।
1.ग्राम के अंदर कोई होटल का निमा्र्रण नहीं होगा।
2.जंगल में किसी किस्म की कटाई नहीं होगी।
3.खनन/मुरम और ईट भट्टे का काम नहीं होगा।
4.वन्य प्राणी को सुरक्षित माहौल दिया जाएगा।
5.इको सेंसेटिव जोन में स्थानीय समिति निर्णय लेगी।
……
जिले की दूसरी सीमा से लगते पेंच नेशनल पार्क में 47 गांव इको सेंसेटिव जोन की श्रेणी में रखे गए हैं। यहां होटल निर्माण और खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इको सेंसेटिव जोन में आने वाले क्षेत्रों में लोग स्वयं के मकान निर्माण कर सकते हैं लेकिन वाणिज्यिक उपयोग के निर्माण के लिए अनुमति लेनी होगी। सेंसेटिव जोन में के निर्देश के हिसाब से ही मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
-ऋषभा नेताम डिप्टी डायरेक्टर एसटीआर
Published on:
24 Dec 2025 11:43 am
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