scriptBadisadri Neemuch Railway Line Project Investment of Rs 107 crore | बड़ी खुशखबरी : राजस्थान में यहाँ आजादी के बाद दोबारा शुरू हो रही है रेलवे लाइन परियोजना | Patrika News

बड़ी खुशखबरी : राजस्थान में यहाँ आजादी के बाद दोबारा शुरू हो रही है रेलवे लाइन परियोजना

locationचित्तौड़गढ़Published: Feb 03, 2024 02:15:17 pm

Submitted by:

Ashish sharma

Rajasthan Railway Line Project : गुरुवार को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश अंतरिम बजट में राजस्थान रेलवे को 9782 करोड़ रुपए दिए गए हैं। जिसमें चित्तौडग़ढ़ को बड़ीसादड़ी-नीमच रेलवे लाइन परियोजना के लिए 107 करोड़ रुपए तो वहीं अजमेर-चित्तौड़गढ़ डबल लाइन के लिए भी 105 करोड़ रुपए का निवेश होना है। इसका सीधा फायदा मेवाड़, मारवाड़ और मालवा की संस्कृति को जोडऩे और व्यापार की जीवन रेखा को होगा।

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बड़ीसादड़ी-नीमच रेलवे लाइन परियोजना कार्यों में नई रेललाइन, दोहरीकरण, आमान परिवर्तन सहित अन्य परियोजनाएं शामिल है। रतलाम मंडल के जनसम्पर्क अधिकारी खेमराज मीणा ने बताया कि 2023 में बड़ीसादड़ी-नीमच नई रेल लाइन पर कार्रवाई शुरू हो गई थी। भूमि अधिग्रहण के साथ ही निविदा आमंत्रित कर कार्य भी शुरू हो गया है। सामरिक महत्व के साथ यह परियोजना मेवाड़, मारवाड़ और मालवा की संस्कृति को जोडऩे और व्यापार की जीवन रेखा है।
अजमेर-चित्तौड़गढ़ डबल लाइन के लिए भी मिले 105 करोड़

अंतरिम बजट में अजमेर-चित्तौड़गढ़ रेल ट्रेक को डबलिंग के लिए भी 105 करोड़ दिए गए है। चित्तौड़गढ़ से नीमच तक रेलवे ट्रैक पहले से डबलिंग है। नीमच से रतलाम के बीच का कुछ हिस्सा इसी वित्त वर्ष में या अगले वित्त वर्ष में पूरा हो जाएगा। चित्तौड़ से अजमेर और नीमच-रतलाम डबल ट्रैक पूरा होने पर अजमेर से रतलाम तक का पूरा खंड एक तरह से सुपरफास्ट ट्रैक बन जाएगा।
अंतरिम बजट में चित्तौड़गढ़ को यह मिला

- नीमच-बड़ीसादड़ी नई लाइन (48 किलोमीटर) के लिए 100 करोड़

- चंदेरिया के पास समपार संख्या 86 के स्थान पर दो लेन वाला ऊपरी सडक़ के लिए पुल 5 करोड़
- निम्बाहेड़ा के पास समपार संख्या 103 के स्थान पर दो लेन वाला ऊपरी सडक़ पुल के लिए 2 करोड़

आजादी के बाद दोबारा शुरू हो रही है बड़ीसादड़ी-नीमच रेलवे लाइन परियोजना

देश की आजादी के साथ ही परियोजना को अधूरा छोड़ दिया। राजवाड़ों का राज भी चला गया। तब से वर्ष 2013 तक इस परियोजना को लेकर लगातार पत्र व्यवहार चलता रहा। वर्ष 1956 से लेकर 2013 तक हर बार रेल मंत्री और अधिकारियों की ओर से एक ही जवाब आता रहा कि रेलवे के पास बजट नहीं है। अगली परियोजना में उचित प्रबंध किया जाएगा।

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