मणिपुर: सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के 10 मिनट बाद नवजात की मौत, बांस के टुकड़े से काटी गई गर्भ नाल

मणिपुर: सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के 10 मिनट बाद नवजात की मौत, बांस के टुकड़े से काटी गई गर्भ नाल

Shiwani Singh | Publish: Sep, 16 2018 09:27:27 AM (IST) क्राइम

मणिपुर के सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के दस मिनट बाद नवजात शिशु की मौत हो गई।

नई दिल्ली। मणिपुर के सरकारी अस्पताल में शनिवार को प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आया है। पैदा होने के दस मिनट बाद ही नवजात की मौत हो गई। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने जिला अस्पताल में खुब हंगामा मचाया। घरवालों ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों पर बच्चे की मौत का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है। बता दें कि यह मामला मणिपुर के चौवाइनवाइ खूनोऊ गांव के सेनापति जिला अस्पताल का है।

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अस्पताल में मौजूद नहीं था डॉक्टर

घरवालों ने बताया कि बच्चे की मां एच लोहा को अचानक पेट में दर्द शुरू हो गया। महिला के पति पुनी ने शनिवार को रात 11.50 मिनट पर उसे डिलीवरी के लिए अपने गांव चौवाइनवाइ खूनोऊ से ढाई किलोमीटर दूर स्थित सेनापति जिल अस्पताल लेकर भागे। अस्पताल पहुंचते ही उन्होंने डॉक्टर के लिए पूछा। पुनी को अस्पताल के कमरा नंबर 36 पर जाने के लिए कहा गया। हालांकि जब वे कमरें में पहुंचे तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद ही नहीं था।

बांस के टुकड़े से काटा गया गर्भ नाल

महिला को काफी तेज दर्द हो रहा था, जैसे-तैसे उसे अस्पताल के एक कोने में ले जाया गया। महिला ने यहीं पर बच्चे को जन्म दिया। वहीं, जन्म के बाद नाभी के पास की गर्भ नाल को बांस के टुकड़े से काटा गया, जिसके दस मिनट बाद ही बच्चे की मौत हो गई। इस दौरान महिला वहीं पर पड़ी रही। इसके बाद महिला को सुबह 7.30 बजे के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल महिला की हालत स्थिर बनी हुई है।

घटना के समय सोये हुए थे स्टाफ

वहीं, अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर लोली ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रात का समय होने के कारण स्टाफ सोये हुए थे। उन्होंने सही समय पर सही कदम नहीं उठाया। उनकी लापरवाही की वजह से ये हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि जिस समय ये घटना हुई उस समय अस्पताल में दो नर्स, एक डॉक्टर और चार अन्य कर्मचारी मौजूद थे। सीएमओ ने कहा कि उच्च अधिकारियों से परामर्श लेने के बाद सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कर्रवाई की जाएगी। वहीं, पीड़ित परिवार को जो भी संभव सहायता होगी प्रदान की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन ने दिया उचित कार्रवाई का भरोसा

इससे पहले पीड़ित परिवार ने बच्चे का शरीर वापस लेने से इनकार कर दिया था। उनकी मांग थी कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक वह शव को अस्पताल से नहीं ले जाएंगे। परिजन तीन दिन के अंदर की कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में अस्पताल प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाए जाने के बाद परिजन बच्चे का शव लेने को तैयार हुए।

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