दिवाली में देर रात तक शहरों में फूटते रहे पटाखे, खतरनाक स्थिति में पहुंचा प्रदूषण का ग्राफ

दीपावली पर्व में शहर समेत आसपास के क्षेत्रों में जमकर पटाखा फोड़े गए। इससे निकलने वाले गैस से प्रदूषण का ग्राफ एक बार फिर बढ़ गया है।

धमतरी. दीपावली पर्व में शहर समेत आसपास के क्षेत्रों में जमकर पटाखा फोड़े गए। इससे निकलने वाले गैस से प्रदूषण का ग्राफ एक बार फिर बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि इस साल पटाखों से होने से वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कोई विशेष तैयारी नहीं की गई थी।

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सालों में शहर में वायु प्रदूषण का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने भी इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे संज्ञान में लेते हुए दीपावली के मौके पर रात 10 बजे तक ही पटाखा जलाने की अनुमति प्रदान की गई थी। यही नहीं प्रदूषण के ग्राफ को कम करने के लिए पटाखा व्यवसायियों को ग्रीन पटाखे बचने के लिए कहा गया था, लेकिन इसका असर शहरी जिले में देखने को नहीं मिला। यहां एक भी व्यापारियों ने ग्रीन पटाखा बेचने के लिए लाइसेंस नहीं लिया था। ऐसे में बाजार में सल्फर, नाइट्रोजन और चारकोल से बनी पटाखों की जमकर बिक्री की गई है। उधर लक्ष्मी पूजा दिन शाम को पटाखा जलाने का दौर शुरू हुआ। दो दिनों तक सुबह-शाम पटाखा जलाने के चलते वायु मंडल में एक बार फिर प्रदूषण का ग्राफ खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया है।

इन इलाकों में ज्यादा प्रदूषण
पत्रिका टीम ने मोबाइल में डाउनलोड अपने प्रदूषण मापी यंत्र में जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण के स्तर जांच की, तो देखा कि पटाखा जलाने से सबसे ज्यादा प्रदूषण हटकेशर, सोरिद वार्ड, जालमपुर, विंध्यवासिनी मंदिर और हरफतराई क्षेत्र में देखने को मिला। यहां सामान्य से 5 फीसदी वायु प्रदूषण ज्यादा पाया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी पुलिस प्रशासन की ओर से वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया।

प्रदूषण एक नजर में
मोबाइल में डाउनलोड प्रदूषण मापी यंत्र से लिए गए डाटा के अनुसार लक्ष्मी पूजा के दिन हटकेशर में प्रदूषण का स्तर 4-6 एक्यूआई था। औद्योगिक, सोरिद और जालपुर वार्ड में में 7-8 एक्यूआई था। जबकि विंध्यवासिनी मंदिर और हफतराई रोड में 8-9 एक्यूआई प्रदूषण का स्तर आया। गोवर्धन पूजा की शाम जब इन्ही स्थानों पर प्रदूषण मापक यंत्र से इसकी पड़ताल की गई, तो अधिकांश जगह पर प्रदूषण का स्तर 7-8 एक्यूआई पर आया। जबकि धमतरी में सामान्यत: वायु में प्रदूषण का स्तर 4-6 एक्यूआई रहता है।

एक सप्ताह का लगेगा समय
पर्यावरण विशेषज्ञ प्रोफसर डॉ अतुल देवांगन ने बताया कि पटाखा जलाने से बड़ी मात्रा में कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रेट और कार्बन डाईआक्साइड जैसे जहरीली गैस निकलती है। यह गैस वातावरण में मिलाकर आक्सीजन के साथ क्रिया कर उसे प्रदूषित कर देती है। पटाखों को जलाने से बड़ी मात्रा में जहरीली गैस वायु मंडल में समा गई है। ऐसे में शहर की आबोहवा को बदलने में करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है।

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Akanksha Agrawal
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