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धार जिले में एक हजार लड़कों पर एक हजार ५६ बेटियां ले रही जन्म, टॉप १० में शामिल

locationधारPublished: Feb 10, 2024 12:33:09 am

Submitted by:

rishi jaiswal

नेशनल फेमिली सर्वे हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में खुलासा, सात सालों में सुधरी लिंगानुपात की स्थिति

धार जिले में एक हजार लड़कों पर एक हजार ५६ बेटियां ले रही जन्म, टॉप १० में शामिल
धार जिले में एक हजार लड़कों पर एक हजार ५६ बेटियां ले रही जन्म, टॉप १० में शामिल
धार. बेटियोंं के जन्म को लेकर समाज में लोगों की सोच बदलने से भू्रण हत्या के आंकड़ों में गिरावट आई। आदिवासी बाहुल्य धार जिले में कम शिक्षा के बावजूद लड़कों के मुकाबले बेटियां अधिक जन्म ले रही है, तो यह किसी खुशी से कम नहीं। जिले में एक हजार लड़कों की तुलना में १० ५६ बेटियां जन्म ले रही है। ये खुलासा नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। पांच साल पहले जिले में एक हजार लड़कों के मुकाबले ९९२ लड़कियों का जन्म हो रहा था।
लिंगानुपात की स्थिति सुधरने से धार उन जिलों की फेहरिस्त में शामिल हो चुका है, जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियोंं का जन्म अधिक हो रहा है। मप्र के टॉप-१० की सूची में धार भी शामिल हो चुका है। सीएमएचओ डॉ. नरसिंह गेहलोत ने बताया कि समाज में महिलाओं और बेटियोंं के प्रति भेदभाव कम होने से जन्म-मृत्युदर का जो अंतर था, वह घटा है। निश्चित तौर पर यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। जिले में बेटियों की जन्मदर बढऩे से ङ्क्षलगनुपात में कमी आएगी। अशिक्षा के बावजूद बेटियों का बढ़ा सम्मान धार जिले की पहचान अति पिछड़े के रूप में होती है। यहां ८० फीसदी आबादी जनजाति व आदिवासी समुदाय की है। इनमें कई लोग पढ़े-लिखे नहीं है। इसके बावजूद बेटियों व महिलाओं को सम्मान देने में सबसे आगे है। यही कारण है कि भ्रूण हत्या जैसा पाप केवल शहरों में होता है। गांवों में नहीं। बड़े शहरों में आज भी अच्छी शिक्षा के बावजूद लोग बेटियों को जन्म देने मेंं संकोच करते हैं। सोनोग्राफी सेंटरों की जांच के निर्देश गुरुवार को सीएमएचओ कार्यालय में पीसी एंड पीएनडीटी के तहत जिला सलाहकार समिति की बैठक हुई। इसमें नेशनल फेमेली हेत्थ सर्वे रिपोर्ट पर चर्चा की गई।
सीएमएचओ ने सभी बीएमओ व डॉक्टरों को अपने क्षेत्र मेंं संचालित निजी सोनोग्राफी सेंटरों की जांच के निर्देश दिए। इनमें सेंटर का पंजीयन, नवीनीकरण व अन्य बातों की जांच करें। शासन की गाइडलाइन का पालन हो रहा है या नहीं, यह देंखे। सात साल के सार्थक परिणामों का नतीजा स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिशु-मृत्यु दर व ङ्क्षलगनुपात को काम करने के लिए संस्थागत प्रसव पर जोर दिया जा रहा है। साल २०१५-१६ के सर्वे में ङ्क्षलगनुपात का अंतर १००० पुरुषों की तुलना में ९९२ महिला का था। इसमें सुधार के बाद १००० लड़कों के मुकाबले १०५६ बेटियोंं की किलकारी गूंज रही है।
गौरव का क्षण
नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे की जाता रिपोर्ट में हमारे जिले में लिंगानुपात की स्थिति में सुधरी है। एक हजार लड़कों के मुकाबले १०५६ बेटियोंं का जन्म हो रहा है। यह हमारे लिए गौरव का क्षण है।
डॉ. एनएस गेहलोत, सीएमएचओ धार

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