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Goddess Lakshmi: देवी लक्ष्मी का दिन है शुक्रवार, जानेंं माता लक्ष्मी से जुड़े अद्भुत रहस्य

माता लक्ष्मी विष्णु से उतनी ही अविभाज्य, जितनी अर्थ से वाणी या बुद्धि से ज्ञान...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

•

Updated: 16 Jul 2021, 12:22 AM IST

Friday: The Day of Goddess Lakshmi

Goddess Lakshmi weekly day

Goddess Lakshmi Secrets: हिंदुओं में देवी लक्ष्मी को धन-धान्य व सौभाग्य की देवी माना गया है। वहीं साप्ताहिक वार में इनका दिन शुक्रवार माना जाता है। ऐसे में आज हम आपको माता लक्ष्मी से जुड़े ऐसे अद्भुत रहस्यों के बारे में बता रहे हैं जो काफी कम ही लोग जानते हैं।

पंडित एसके पांडे के अनुसार वेदों में दर्शाया गया है कि'श्री' या 'लक्ष्मी' धन और भाग्य, शक्ति और सौंदर्य की देवी हैं। अपने पहले अवतार में, पुराणों के अनुसार, वह ऋषि भृगु और उनकी पत्नी ख्याति की बेटी थीं। वह बाद में समुद्र मंथन के समय सागर से पैदा हुईं। भगवान विष्णु के अवतार लेने पर विष्णु की पत्नी होने के नाते, वह उनके जीवनसाथी के रूप में जन्म लेती हैं।

जब भगवान विष्णु वामन, राम और कृष्ण के रूप में प्रकट हुए, तो वह पद्म (या कमला), सीता और रुक्मणी के रूप में प्रकट हुईं। वह विष्णु से उतनी ही अविभाज्य है जितनी अर्थ से वाणी या बुद्धि से ज्ञान, या धर्म से अच्छे कर्म।

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लक्ष्मी का अर्थ:
हिंदुओं में देवी लक्ष्मी का अर्थ सौभाग्य की देवी से है। 'लक्ष्मी'शब्द संस्कृत के "लक्ष्य" शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'उद्देश्य' और माता लक्ष्मी भौतिक और आध्यात्मिक दोनों में धन और समृद्धि की देवी हैं। इसके अलावा वह पवित्रता, उदारता और सुंदरता, अनुग्रह और आकर्षण की भी देवी हैं।

देवी लक्ष्मी की पूजा प्राचीन काल से ही भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है। लक्ष्मी देवी को माता के सामान माना गया है इसी कारण उन्हें केवल "देवी" (देवी) के बजाय "माता" (माता) के रूप में संबोधित किया जाता है। देवी लक्ष्मी की पूजा उन लोगों द्वारा की जाती है जो सौभाग्य के साथ ही धन व धान्य प्राप्त करना या संरक्षित करना चाहते हैं।

ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी (धन) केवल उन्हीं घरों में जाती है जो साफ-सुथरे होते हैं और जहां लोग मेहनती होते हैं। वह उन जगहों पर नहीं जाती हैं, जो अशुद्ध/गंदे हैं या जहां लोग आलसी हैं।

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देवी लक्ष्मी विष्णु की सक्रिय ऊर्जा है। उनके चार हाथ चार पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम , और मोक्ष प्रदान करने की उसकी शक्ति को दर्शाते हैं। जैन स्मारकों में भी लक्ष्मी का प्रतिनिधित्व मिलता है। तिब्बत, नेपाल और दक्षिण पूर्व एशिया के बौद्ध संप्रदायों में, देवी वसुधारा हिंदू देवी लक्ष्मी की विशेषताओं को दर्शाती हैं, जिनमें मामूली प्रतीकात्मक अंतर हैं।

देवी लक्ष्मी प्रतिमा...
लक्ष्मी की प्रतिमा में, उन्हें आमतौर पर आकर्षक रूप से सुंदर और एक झील पर खुले आठ पंखुड़ियों वाले कमल के फूल पर बैठे या खड़े होने और अपने दोनों हाथों में कमल धारण करने के रूप में वर्णित किया गया है। माना जाता है कि इसी वजह से उनका नाम पद्मा या कमला पड़ा।

वह कमल की माला से भी सुशोभित हैं। बहुत बार उनके दोनों तरफ हाथियों को उनके ऊपर पानी के घड़े खाली करते हुए दिखाया जाता है। उसका रंग विभिन्न रूप से गहरा, गुलाबी, सुनहरा पीला या सफेद बताया गया है। जबकि विष्णु की संगति में उन्हें केवल दो हाथों से दिखाया गया है।

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जब एक मंदिर में पूजा की जाती है, तो उन्हें कमल के सिंहासन पर बैठा हुआ दिखाया जाता है, जिसमें वह चार हाथ पद्म, शंख, अमृतकलश और बिल्व फल पकड़े हुए हैं। कभी-कभी, बिल्व के बजाय एक अन्य प्रकार का फल, महालिल्गा (एक साइट्रोन) दिखाया जाता है।

उसके हाथों से सोने के सिक्कों के झरने बहते दिखाई देते हैं, जो यह बताते हैं कि जो लोग उनकी पूजा करते हैं वे धन प्राप्त करते हैं। उन्हें आठ हाथों सहित दिखाए जाने पर उनके हाथों में धनुष-बाण, गदा और चक्र जोड़ दिया जाता है। यह वास्तव में महालक्ष्मी, दुर्गा का ही एक पहलू है।

लक्ष्मी जी का चित्र: यदि सुनहरा पीला है, तो यह उन्हें सभी धन के स्रोत के रूप में दर्शाता है। यदि सफेद है, तो वह प्रकृति (प्रकृति) के शुद्धतम रूप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे ब्रह्मांड विकसित हुआ था। गुलाबी रंग, जो अधिक सामान्य है, प्राणियों के प्रति उनकी करुणा को दर्शाता है, क्योंकि वह सभी की मां है। वहीं कमल खिलने के विभिन्न चरण विकास के विभिन्न चरणों में दुनिया और प्राणियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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माता लक्ष्मी के हाथ में फल : यदि चित्र में माता लक्ष्मी अपने हाथ में - नारियल को खोल, गिरी और पानी के साथ धारण करती हैं - तो इसका मतलब है कि उससे सृष्टि के तीन स्तरों की उत्पत्ति हुई- स्थूल, सूक्ष्म और अत्यंत सूक्ष्म।
- वहीं यदि उनके हाथ में यह अनार या नींबू है, तो यह दर्शाता है कि संपूर्ण दुनिया उनके नियंत्रण में है और वह उन सभी को पार कराती है।
- यदि उनके हाथ में एक बिल्व फल है, जो संयोग से, बहुत स्वादिष्ट या आकर्षक नहीं है, लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा है - यह मोक्ष के लिए है, जो आध्यात्मिक जीवन का सर्वोच्च फल है।
लक्ष्मी जी को कुछ मूर्तियों में, उल्लू को उनके वाहक-वाहन के रूप में दिखाया गया है। वहीं लक्ष्मी जी का वाहन मयूर भी माना जाता है।

देवी लक्ष्मी व्रत और त्यौहार
यूं तो देवी लक्ष्मी की पूजा हर रोज की जाती है, लेकिन जहां सप्ताह में इनका दिन शुक्रवार माना गया है, वहीं साल के कार्तिक माह को लक्ष्मी जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

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शरद पूर्णिमा (कोजागिरी पूर्णिमा) और दिवाली के त्यौहार भी उनके सम्मान में मनाए जाते हैं। दीपावली आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की, बुराई पर अच्छाई की और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है।

लक्ष्मी पूजा भारत के कई हिस्सों में, अश्विन माह में पूर्णिमा के दिन, शरद पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला एक और शरद ऋतु का त्यौहार है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यताओं और किवदंतियों के आधार पर इस विशेष रात्रि का सुख देवों के लिए भी दुर्लभ बताया गया है। इस दिन अमृत की प्राप्ति के लिए देव, गंधर्व सभी पृथ्वी पर आते हैं।

इस पूर्णिमा के दिन पर चंद्रमा की उज्जवलता में अमृत का वास माना गया है। इस शुभ तिथि के अवसर पर जहां चंद्रमा अपने चरम सौंदर्य को पाता है वहीं पृथ्वी को इस दिन अमृत वर्षा की प्राप्ति होती है। चंद्रमा की उज्जवल रोशनी के कण-कण में अमृत का वास होता है।


लक्ष्मी मंत्र :
लक्ष्मी बीज मंत्र...
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥

महालक्ष्मी मंत्र...
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलाल ये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः

लक्ष्मी गायत्री मंत्र...
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्यामहे विष्णुपत्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्

ॐ श्री महालक्ष्मयै चा विद्माहे विष्णु पटन्याई चा धीमही

तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ओम॥

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देवी लक्ष्मी के रुप...
लक्ष्मी के 8 प्राथमिक रूप हैं। इन 8 रूपों को अष्ट लक्ष्मी (अष्टलक्ष्मी) के रूप में माना जाता है। ये आठ रूप इस प्रकार हैं:

1. धान्य लक्ष्मी: धान्य का अर्थ है अनाज। लक्ष्मी फसल की देवी हैं, जो फसल में बहुतायत और सफलता का आशीर्वाद देती हैं। फसल लंबे समय तक धैर्य और खेतों की ओर रुख करने के बाद उपजती है। यह आंतरिक फसल का प्रतीक है, कि धैर्य और दृढ़ता के साथ, हम धन लक्ष्मी के आशीर्वाद के माध्यम से आंतरिक आनंद की प्रचुरता प्राप्त करते हैं।

2. आदि लक्ष्मी: मां लक्ष्मी भगवान नारायण के साथ बैकुंठ में निवास करती हैं। उन्हें रमा के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है मानव जाति के लिए खुशी लाना। उन्हें इंदिरा (कमल या पवित्रता रखने वाली) के रूप में भी जाना जाता है। इस रूप में, लक्ष्मी को आमतौर पर श्री नारायण की सेवा करते देखा जाता है। भगवान नारायण सर्वव्यापी हैं। श्री नारायण की सेवा करने वाली आदि लक्ष्मी या रमा लक्ष्मी पूरी सृष्टि की सेवा करने का प्रतीक हैं। आदि लक्ष्मी और नारायण दो अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही हैं। वास्तव में लक्ष्मी जी को श्री नारायण की शक्ति माना जाता हैं।

3. धैर्य लक्ष्मी: मां लक्ष्मी का यह रूप अनंत साहस और शक्ति का वरदान देता है। ये बताता है कि जो अनंत आंतरिक शक्ति के साथ तालमेल रखते हैं, उनकी हमेशा जीत होती है।

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जो लोग मां धैर्य लक्ष्मी की पूजा करते हैं वे जबरदस्त धैर्य और आंतरिक स्थिरता के साथ जीवन जीते हैं।

4. गज लक्ष्मी: श्रीमद्भागवत के पवित्र ग्रंथ में देवताओं और राक्षसों द्वारा समुद्र मंथन की कथा का विस्तार से वर्णन किया गया है। ऋषि व्यास लिखते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी समुद्र से निकली थीं। इसलिए उन्हें सागर की पुत्री के रूप में जाना जाता है। वह एक पूर्ण खिले हुए कमल पर बैठी समुद्र से निकली और दोनों हाथों में कमल के फूल लिए हुए थीं, जिनके दोनों ओर दो हाथी थे, जो सुंदर बर्तन लिए हुए थे।

5. संतान लक्ष्मी : पारिवारिक जीवन में बच्चे सबसे बड़ा खजाना होते हैं। संतान लक्ष्मी के नाम से विख्यात श्री लक्ष्मी के इस विशेष रूप की पूजा करने वालों को मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के साथ वांछित संतान के रूप में धन प्राप्त होता है।

6. विजय लक्ष्मी: विजय का अर्थ सभी उपक्रमों और जीवन के सभी विभिन्न पहलुओं में सफलता प्राप्त करना है। अत: माता विजय लक्ष्मी की कृपा से सर्वत्र, हर समय, हर परिस्थिति में सफल होने वालों की ही विजय होती है। विजय लक्ष्मी की जय!

7. धन लक्ष्मी: धन कई रूपों में आता है- प्रकृति, प्रेम, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि, भाग्य, गुण, परिवार, भोजन, भूमि, जल, इच्छा शक्ति, बुद्धि, चरित्र आदि। माना जाता है कि मां धन लक्ष्मी की कृपा से हमें यह सब बहुतायत में प्राप्त होगा ।

8. विद्या लक्ष्मी: विद्या ही शिक्षा है। शांति, नियमितता, घमंड की अनुपस्थिति, ईमानदारी, सरलता, सत्यता, समता, स्थिरता, गैर-चिड़चिड़ापन, अनुकूलनशीलता, नम्रता, तप, अखंडता, बड़प्पन, उदारता, दान और पवित्रता सहित कुल अठारह गुण हैं जो उचित शिक्षा के माध्यम से आत्मसात किए जा सकते हैं और यही अमरता भी दे सकते हैं।

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देवी लक्ष्मी मंदिर :

1. महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर देश का सबसे प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिरों में एक माना जाता है। इस मंदिर के संबंध में मान्यता है कि यहां साल में दो बार सूर्य की किरणें मां लक्ष्मी के विग्रह पर सीधी पड़ती है।

इस मंदिर का निर्माण 7वीं सदी में चालुक्य वंश के शासक कर्ण देव ने करवाया था। बताया जाता है कि यहां की लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7 हजार साल पुरानी है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां सूर्य देव खुद मां लक्ष्मी का पद अभिषेक करते हैं।

2. चौरासी मंदिर...
चौरासी मंदिर भ्रामौर में स्थित है जो हिमाचल प्रदेश राज्य में चंबा घाटी से 65 किलोमीटर दूर है। लक्ष्मी देवी, गणेश और मणिमहेश और नरसिंह के मुख्य मंदिरों को चौरासी मंदिर कहा जाता है।

3. छतरपुर मंदिर....
छतरपुर मंदिर दिल्ली के महरौली क्षेत्र में प्रसिद्ध कुतुब मीनार से लगभग 4 किमी की दूरी पर स्थित है। यह एक खूबसूरत स्मारक है जो दक्षिण भारतीय के साथ-साथ उत्तर भारतीय वास्तुकला की शैली में बनाया गया है।

4. महा लक्ष्मी मंदिर, मुंबई...
मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर शहर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह मुंबई में ब्रीच कैंडी में बी देसाई रोड पर स्थित है, यह शहर के सबसे अधिक देखे जाने वाले मंदिरों में से एक है। मंदिर अपने विशिष्ट इतिहास और भक्ति के लिए प्रसिद्ध है।

5. श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर...
श्रीपुरम का स्वर्ण मंदिर तमिलनाडु के वेल्लोर शहर में "मलाइकोडी" के नाम वाले स्थान पर हरी-भरी पहाड़ियों की एक छोटी श्रृंखला के तल पर स्थित एक आध्यात्मिक पार्क है। मंदिर वेल्लोर शहर के दक्षिणी छोर पर तिरुमलाइकोडी शहर में है। तिरुमलाईकोडी वेल्लोर से लगभग 8 किलोमीटर दूर है।