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बंधनों में नहीं उलझें, भगवान की भक्ति ही मुक्ति का मार्ग

बेंगलूरु. मागडी रोड स्थित अग्रहारा दासरहल्ली में बाबा रामदेव प्रार्थना मंदिर में चल रही रामकथा गुरुवार को शोभायात्रा के साथ संपन्न हुई। कथा के अंतिम दिन कथावाचक संत त्रिलोक दास ने भगवान राम के राजतिलक का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति ही मुक्ति का मार्ग है। सांसारिक बंधनों में उलझने से व्यक्ति […]

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बेंगलूरु.

मागडी रोड स्थित अग्रहारा दासरहल्ली में बाबा रामदेव प्रार्थना मंदिर में चल रही रामकथा गुरुवार को शोभायात्रा के साथ संपन्न हुई। कथा के अंतिम दिन कथावाचक संत त्रिलोक दास ने भगवान राम के राजतिलक का प्रसंग सुनाया।

उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति ही मुक्ति का मार्ग है। सांसारिक बंधनों में उलझने से व्यक्ति को दुःख सहना पड़ता है, जबकि ईश्वर भक्ति से दुःख दूर होकर सुख और संतोष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए समाज को संगठित रहने की आवश्यकता है।

कथावाचक ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कारवान, मर्यादित और धर्मनिष्ठ बनाए रखने के लिए धार्मिक परंपराओं का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित रहेगा तो धार्मिक आयोजनों की निरंतरता बनी रहेगी।

कथा के समापन अवसर पर मंदिर परिसर से शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इसके बाद महाप्रसादी का वितरण किया गया।

इससे पूर्व कथावाचक और उनके साथ आए भजन मंडली सदस्यों का सम्मान किया गया। मंदिर के पुजारी पं. नवीन पाण्डेय का भी अभिनंदन किया गया। बाबा रामदेव भक्त महिला मंडल और रामस्नेही महिलाओं ने संत त्रिलोकदास का स्वागत कर आभार व्यक्त किया।