इंटरनेशनल नृत्यांगना Neha Bhatnagar को नहीं भाया अमेरिका, 5 साल से बेटियों को सीखा रहीं डांस

दिल्ली की नेहा भटनागर अमेरिका से अंडर ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी कर इंडिया लौटी तो उनकी मुलाकात नृत्य गुरु डॉ. सरोजा वैद्यानाथन से हुई।

भिलाई. भारत सरकार ने बेटियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने का नारा दिया और इन नारे को चरितार्थ करने दिल्ली की नेहा भटनागर पांच सालों से जुटी हुई है। डांस के जरिए स्लम एरिया की सौ से ज्यादा बेटियों को फ्री में डांस सिखा रही है ताकि इस नृत्य के जरिए उनकी जिंदगी बदल जाए।

शास्त्रीय नृत्य की महक विदेशों में

नेहा की मेहनत रंग लाई और इन बेटियों में से 20 ऐसी है जो अब विदेशों में जाकर न सिर्फ परफार्म कर रही है बल्कि वहां वर्कशॉप लेकर देश के शास्त्रीय नृत्य की महक विदेशों में फैला रही है। अमेरिका से अंडर ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी कर इंडिया लौटी तो नेहा की मुलाकात नृत्य गुरु डॉ. सरोजा वैद्यानाथन से हुई।

घर में अब बेटियों के प्रति सोच बदल गई
उनसे मिलकर वे भरतनाट्यम से कुछ इस तरह जुड़ गई कि उसके लिए जिंदगी के मायने ही डांस हो गया। नेहा की मानें तो उन 20 लड़कियों में कुछ ऐसी भी है जिनके घर में अब बेटियों के प्रति सोच बदल गई है। वे बताती है कि उनकी स्टूडेंट ने जब यह बताया कि घर में अब भाई के साथ-साथ उसे भी केला खाने मिलता है तो उसे महसूस हुआ कि वह लड़कियां किस कदर भेदभाव के बीच अपना जीवन काट रही थीं।

क्लास नहीं मास को जोडऩा जरूरी
शास्त्रीय नृत्य से लोगों को जोडऩे डांस क्लास लेने से ज्यादा जरूरी है उन्हें सीधे जोडऩा। नेहा का मानना है कि शास्त्रीय नृत्य को भी ग्लोबलाइजेशन की जरूरत है। हम नृत्य की शैली से छेड़छाड़ नहीं करते बल्कि उसे प्रजेंट करने के तरीकों को बदल रहे हैं।

कैलेंडेर के लिए फोटो शूट

उन्होंने बताया कि उनकी संस्था सर्वम की शुरुआत दिल्ली के बसंतकुंज में एक पेड़ के नीचे से हुई थी, लेकिन आज इस संस्था में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार मंच शेयर करते हैं। वे पिछले तीन सालों से शास्त्रीय कलाकारों पर आधारित कैलेंडर प्रकाशित करती है और तीन साल में ही अब बड़े-बड़े कलाकार उनके कैलेंडेर के लिए फोटो शूट करना चाहते हैं।

दिल्ली में नहीं भिलाई जैसा समर्पण

30 वर्षीय नेहा पिछले तीन दिनों से नृत्यधाम की छात्राओं को नृत्य सिखा रही है। वे कहती हैं कि भिलाई के बारे में उनकी सोच अलग थी, लेकिन यहां आने के बाद जो देखा उसे बयां करना मुश्किल है। उनका कहना है कि दिल्ली में जो बच्चे नृत्य सीख रहे हैं उनके मुकाबले भिलाई के बच्चे कई गुना समर्पित और अपने डांस के लिए ईमानदार है। ऐसा समर्पण मेट्रो सिटी में नहीं दिखाई देता।

15 से ज्यादा देशों में दी परफार्मेंस
नेहा ने अब तक 15 से ज्याद देशों में अपने नृत्य की प्रस्तुति दी है। भारत हो या विदेश हर जगह उनके शो हाउसफुल होते हैं। वे बताती हैं कि शास्त्रीय नृत्य की जब तक आप दर्शकों में समझ पैदा नहीं करेंगे वे उसमें रुचि नहीं लेंगे। इसलिए वह अपनी हर परफार्मेंस के पहले मंच में आकर पहले मुद्राएं, उस डांस का विवरण, उसके प्रसंग को समझाती है ताकि दर्शक उसमें डूब सकें।


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Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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