भारत के लिए अगले छह साल, इकोनॉमी को बनाएंगे बेमिसाल

  • सीईबीआर की रिपोर्ट, 2026 में दुनिया की चौथी सबसे इकोनॉमी हो सकती है भारत
  • जापान को पीछे छोड़ भारत 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी के लक्ष्य को कर सकता है हासिल
  • तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनने के लिए जापान, जर्मनी और भारत के बीच रहेगी प्रतियोगिता

By: Saurabh Sharma

Updated: 30 Dec 2019, 09:02 AM IST

नई दिल्ली। जहां एक ओर भारत सरकार ( Indian govt ) को गिरती इकोनॉमी के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नववर्ष से पहले एक आर्थिक एजेंसी की रिपोर्ट ने Indian Govtचेहरे पर खुशी दिला दी है। एजेंसी के अनुसार आने वाले 6 साल देश की इकोनॉमी के बेमिसाल होने वाले हैं। यह बात ब्रिटिश एजेंसी सेंटर फॉर इकनॉमिक्स एंड बिजनस रिसर्च ( CEBR ) की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2026 में जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है। वहीं 2034 तक तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी पर भी काबिज हो सकता है। खास बात तो ये है कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी ( PM Narendra Modi ) ने 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी ( 5 trillion dollar economy ) बनाने का लक्ष्य रखा है, जबकि रिपोर्ट में ऐसा संभव 2026 में होने की संभावना जताई है। आपको बता दें कि मौजूदा समय देश की इकोनॉमी 4.5 फीसदी की रफ्तार से रेंग रही है।

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चार से तीन में पहुंचने में लगेगा समय
वर्ल्ड इकनॉमिक लीग टेबल 2020 शीर्षक से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी है, यह पोजिशन भारत ने फ्रांस और ब्रिटेन को पछाड़कर हासिल की है। सीईबीआर की मानें तो तीसरी पोजिशन को हासिल करने के लिए अगले 15 सालों तक जापान, जर्मनी और भारत के कढ़ा संघर्ष देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट में 2024 तक पीएम मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने लक्ष्य के बारे में जिक्र किया गया है। जिसे 2026 तक हासिल कर सकता है। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की इकोनॉमी पर छाए काले बादलों की वजह से लक्ष्य पर पहुंचने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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मंदी की वजह से आ गया है दबाव
2019 में आर्थिक मंदी की वजह से रफ्तार सुस्त है, जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए दबाव बढ़ गया है। सीईबीआर के सीनियर इकोनॉमिस्ट पाबलो शाह के अनुसार भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था का तमगा प्राप्त था, लेकिन 2019-20 की सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 4.5 फीसदी रही, जो 6 साल में न्यूनतम है। जिसके लिए निवेश और उपभोग में कमी को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

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