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पर्यटन सर्किट का इंतजार

पुरा धरोहरों का धनी झालावाड़ पिछले सात साल से पर्यटन सर्किट के इंतजार में है।सरकार के प्रस्ताव भले ही

झालावाड़

Published: December 11, 2015 09:03:44 pm

झालावाड़।पुरा धरोहरों का धनी झालावाड़ पिछले सात साल से पर्यटन सर्किट के इंतजार में है।सरकार के प्रस्ताव भले ही 2008 से ठण्डे बस्ते में हों, झालावाड़ की उम्मीदें अब भी गर्म हैं। वजह यह कि 7 साल पहले की ही तरह अब भी उनकी विधायक मुख्यमंत्री हैं।

 राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में जिले के किलों व इमारतों को सहेजने व पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से पर्यटन स्थलों को सर्किट बनाने के प्रस्ताव तैयार किए थे लेकिन वर्ष 2008 के अंत में सरकार के बदलने के बाद प्रस्तावों पर अमल नहीं होने से योजना शिथिल पढ़ गई।

बारां में शेरगढ़ का किला, झालावाड़ में पुरामहत्व की इमारतों सहित संग्रहालय व गागरोन विश्व धरोहर, सूर्य मंदिर, चन्द्रभागा, अकलेरा में दलहनपुर का किला, खानपुर के भीमसागर में महू के महल डग में कौल्वी की गुफाएं शामिल कर झालावाड़ को पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव था। फिलहाल राज्य में सात पर्यटन सर्किट अस्तित्व में हैं। उधर, मुकंदरा में टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद इसका महत्व बढऩे पर्यटक जिले की ओर रुख करेंगे।


इसलिए है जरूरत

सर्किट नहीं बनाए जाने से अभी विदेशी पर्यटकों को अलग अलग स्थलों को देखने आना मजबूरी बना हुआ है। इसके चलते समय व धन की हानि होती है।
अभी हाड़ौती के पर्यटन सर्किट होने और बूंदी के इतिहास का महत्व अधिक होने से विदेशी पर्यटक बूंदी, कोटा देखकर ही चले जाते हंै। झालावाड़ व बारां में भी पुरामहत्व की व कई ऐतिहासिक इमारतें व किले हंै। झालावाड़ के पर्यटन सर्किट बनने से बारां व जिले की इमारतों व किले शामिल होने से लोग विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे। अलग सर्किट होने से इमारतों को एक ही पैकेज में देख सकेंगे। अगर पर्यटन सर्किट के प्रस्तावों पर अमल होता है तो राज्य सरकार की ओर से इमारतों व किलों का समय-समय पर जीर्णोद्धार बजट मिलेगा। पर्यटकों के आने से राजस्व में इजाफा होगा। गढ़ परिसर में संग्रहालय व कई पुरामहत्व की चीजों को संग्रहीत किया गया है। परिसर को सहेज इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है। गढ़ परिसर में पुरामहत्व की पहली ओपेरा शैली के आधार पर रंगमंच भवानी नाट्यशाला, शीशमहल की दीवारों पर कंगूरों की आकृति, नक्काशी को सहेजा जाए, तो पर्यटक आकर्षित होंगे।

चिह्नित होंगे प्वाइंट

विश्व धरोहर सूची में गागरोन के किले में शामिल होने के बाद अब पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। राज्य में एकमात्र जलदुर्ग होने से ये पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण का केन्द्र है। सर्किट बनने के बाद पर्यटकों के लिए पर्यटन प्वाइंटों व रेल व एयर कनेक्टिवटी का भी ध्यान रखा जाएगा। पर्यटक एक स्थल से दूसरे स्थल पर जाने के लिए क्या मार्ग रहेंगे। ये रूट भी तय किए जाएंगे। वहीं ऐतिहासिक दृष्टि से किले का महत्व अधिक होने से इस किले को रिसर्च स्कॉलर व इतिहासविद अध्ययन के लिए आएंगे।

झालावाड़ में समुचित पर्यटन स्थल हैं। सर्किट के लिहाज से देखें तो काफी गुंजाइश है। पर्यटन सर्किट बनने से जहां बजट में इजाफा होगा। वहीं पर्यटक भी अधिक आएंगे। इस तरह के प्रस्ताव पहले गए थे।चन्द्रशेखर व्यास उपनिदेशक पर्यटन विभागं
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